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इस देश में पुरुषों की भारी कमी… महिलाएं किराए पर ले जाती हैं पति और बोलती हैं ऐसा करने को फिर पैसे देके कर देती हैं विदा

यूरोप का एक छोटा-सा लेकिन ठंडा बाल्टिक देश है, लातविया जो इन दिनों एक अजीब लेकिन बेहद व्यावहारिक वजह से दुनिया भर में चर्चा में है। यहां महिलाएं अब “एक घंटे के पति” किराए पर ले रही हैं। सुनने में यह बात जितनी अटपटी लगती है, असल में उतनी ही ज़रूरी भी है।

इस सर्विस में न कोई रोमांस है, न शादी का वादा और न ही भावनात्मक जुड़ाव। काम बस इतना है कि कोई आए, नल ठीक करे, भारी सामान उठाए, दीवार पेंट कर दे या फर्नीचर जोड़ दे और फिर अपने रास्ते चला जाए।

लातविया में पुरुषों की कमी कोई अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। जनवरी 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों के मुकाबले करीब 15.5 प्रतिशत ज्यादा महिलाएं हैं, जबकि पूरे यूरोपीय संघ का औसत सिर्फ 4.4 प्रतिशत है। उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर और गहरा हो जाता है। 65 साल से ऊपर की आबादी में महिलाएं पुरुषों से लगभग दोगुनी हैं। पुरुषों की कम उम्र, खराब सेहत और ज्यादा मौतें इस असंतुलन को और गंभीर बना रही हैं।

खराब लाइफस्टाइल बनी बड़ी वजह

लातविया के पुरुषों की जीवन-प्रत्याशा महिलाओं से करीब 10 साल कम है। इसकी वजहें साफ हैं—शराब की लत, ज्यादा धूम्रपान, खराब खान-पान और आत्महत्या की ऊंची दर। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में स्मोकिंग महिलाओं के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है और मोटापे की समस्या भी आम है। नतीजा यह हुआ कि कई घरों में महिलाएं अकेले रह गईं और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी मुश्किल बनने लगे।

‘एक घंटे का पति’ बना आसान समाधान

इसी जरूरत से जन्म हुआ “हसबैंड फॉर एन आवर” जैसी सर्विस का। Komanda24 और Remontdarbi.lv जैसी कंपनियां प्रोफेशनल हैंडिमैन उपलब्ध कराती हैं, जो तय समय में घर के काम निपटाकर चले जाते हैं। न ज्यादा बातचीत, न किसी तरह की निजी उम्मीद। बस काम और भुगतान। मांग इतनी बढ़ गई है कि कई बार इन कंपनियों को नए काम लेने से मना करना पड़ रहा है। यह सर्विस अब मज़ाक नहीं, बल्कि एक जरूरी सुविधा बन चुकी है।

समाज और रिश्तों पर पड़ता असर

इस जेंडर असंतुलन का असर सिर्फ घर तक सीमित नहीं है। डेटिंग, सोशल लाइफ और वर्कप्लेस—हर जगह महिलाएं ज्यादा और पुरुष कम नजर आते हैं। कई महिलाएं अब विदेशों में पार्टनर ढूंढ रही हैं। सोशल इवेंट्स में भी पुरुषों की कमी खलती है। फिर भी लातविया की महिलाएं हालात को लेकर बैठकर शिकायत नहीं कर रहीं, बल्कि व्यावहारिक रास्ता अपना रही हैं।

आज लातविया यह दिखा रहा है कि जब जनसंख्या संतुलन बिगड़ता है, तो समाज भी नए तरीके खोज लेता है। यहां प्यार से ज्यादा ज़रूरत है एक ऐसे इंसान की, जो आए, काम करे और बिना ड्रामा के चला जाए। शायद यही आने वाले समय की सच्चाई है।

news desk

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