दुनिया की ताकत का संतुलन तेजी से बदल रहा है और अब इस बदलाव पर ईरान ने खुलकर बड़ा दावा किया है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि वैश्विक व्यवस्था एक बड़े मोड़ पर खड़ी है, जहां पश्चिमी देशों का वर्चस्व कमजोर पड़ता दिख रहा है और “ग्लोबल साउथ” का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
गालिबाफ के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के दबाव के बावजूद ईरान की हालिया 70 दिनों की “प्रतिरोध रणनीति” ने इस बदलाव को और गति दी है। उनका कहना है कि अब दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पारंपरिक ताकतों की जगह उभरते देशों की भूमिका निर्णायक होगी।
ईरानी नेता ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सदी में पहली बार दुनिया में बड़े बदलाव तेजी से हो रहे हैं।” गालिबाफ ने इसे मौजूदा वैश्विक बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि अब शक्ति संतुलन पश्चिम से हटकर एशिया और अन्य उभरते क्षेत्रों की ओर जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अहम बैठक हुई। इस मुलाकात में व्यापार, टैरिफ और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। शी जिनपिंग ने भी साफ कहा कि दुनिया एक “नए मोड़” पर खड़ी है और अंतरराष्ट्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच “थ्यूसीडिड्स ट्रैप” की चर्चा भी तेज हो गई है। यह एक ऐसी स्थिति को दर्शाता है, जब कोई उभरती ताकत किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव इसी दिशा की ओर इशारा करता है।
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