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मोदी सरकार बदलने जा रही ‘मनरेगा’ का नाम! कोविड काल में मनरेगा कैसे बनी थी गरीबों की ढाल?

मोदी सरकार मनरेगा योजना को लेकर एक बड़े फैसले की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार इस योजना के नाम में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है और प्रस्तावित तौर पर इसका नया नाम ‘जी राम जी’ योजना रखा जा सकता है। इतना ही नहीं, सरकार इस संबंध में संसद में विधेयक (बिल) भी ला सकती है।

सरकार से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत सालाना रोजगार उपलब्ध कराने के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की घोषणा भी संभव है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है।

भले ही मोदी सरकार मनरेगा योजना का नाम बदलने की तैयारी में हो, लेकिन कोरोना काल के दौरान इस योजना ने करोड़ों लोगों को बड़ी राहत दी थी। लॉकडाउन के समय ग्रामीण इलाकों में रोजगार के लिए मनरेगा एक अहम सहारा बनी।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में संसद में दिए एक भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों की 60 वर्षों की “विफलताओं का जीवंत स्मारक” बताया था। उन्होंने कहा था कि यह योजना ग्रामीण गरीबी का प्रतीक है, जहां लोग गड्ढे खोदने जैसे मामूली काम करने को मजबूर हैं।
हालांकि, पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार इस योजना को बंद नहीं करेगी, बल्कि इसे पिछली सरकारों की विफलताओं के प्रमाण के रूप में जारी रखेगी।

इसके बावजूद, कोरोना संकट के दौरान मनरेगा गरीब और ग्रामीण तबके के लिए बड़ी राहत साबित हुई।
न्यूज़ एजेंसी द वायर के अनुसार, उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि मई–जून 2020 के दौरान औसत व्यक्ति-दिवस रोजगार में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। कृषि के चरम मौसम के कारण जुलाई–अगस्त 2020 में इसमें गिरावट जरूर आई, लेकिन इसके बावजूद अगस्त 2020 में भी रोजगार का स्तर 2019 की तुलना में थोड़ा अधिक रहा।

कुल मिलाकर, एमएनआरईजीए के तहत प्रदान किए गए व्यक्ति-दिवस रोजगार में

जनवरी–मार्च और अप्रैल–मई 2020 के बीच 19 प्रतिशत,

जून–जुलाई 2020 के दौरान 94 प्रतिशत,

और अगस्त 2020 में 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

मोदी सरकार ने 2014 से दिसंबर 2025 के बीच यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई कई प्रमुख योजनाओं के नाम बदले या उनका रीब्रांडिंग किया। कांग्रेस का दावा है कि इस दौरान करीब 23 योजनाओं के नाम बदले गए।

हालांकि, उपलब्ध तथ्यों और सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राजीव गांधी के दौर की कई अहम योजनाओं के नामों में बदलाव किया गया है। कुछ योजनाओं को नए नाम और नए स्वरूप के साथ पेश किया गया, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इन्हें नई पहल के तौर पर प्रचारित किया गया।

इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस जारी है, जहां एक ओर सरकार इसे रीब्रांडिंग और प्रशासनिक सुधार बताती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे पहले से मौजूद योजनाओं को अपना बताने की कोशिश करार देती है।

news desk

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