नई दिल्ली: परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और समाज की जिम्मेदारियों के बीच कई बार लोग अपनी जरूरतों और भावनाओं को पीछे छोड़ देते हैं। दूसरों की मदद करना और उनकी जरूरतों का ख्याल रखना अच्छी बात है, लेकिन लगातार खुद को नजरअंदाज करना जीवन में असंतुलन पैदा कर सकता है। अपनी भावनाओं को समझने, तनाव कम करने और खुद को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए अपने लिए समय निकालना जरूरी है।
अपनी जरूरतों का ध्यान रखना स्वार्थी होना नहीं है। इसे आत्म-देखभाल के तौर पर देखा जाना चाहिए। अगर आप भी हर बार अपनी जरूरतों से पहले परिवार और दूसरों को प्राथमिकता देते हैं, तो कुछ छोटी आदतों के जरिए अपने लिए भी जरूरी जगह बनाई जा सकती है।
दूसरों के लिए जीते-जीते खुद को न भूलें
समाज में त्याग और समर्पण को हमेशा सम्मान की नजर से देखा जाता है। माता-पिता बच्चों की जरूरतों के लिए अपनी इच्छाएं छोड़ देते हैं, कर्मचारी काम की जिम्मेदारियों में निजी जीवन को पीछे कर देते हैं और कई लोग परिवार की खुशी के लिए अपनी पसंद तक भूल जाते हैं। दूसरों के लिए ऐसा करना सराहनीय है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।
जब कोई व्यक्ति लगातार दूसरों की अपेक्षाएं पूरी करने में लगा रहता है और अपनी जरूरतों को टालता जाता है, तो समय के साथ उसके भीतर थकान, तनाव और असंतोष बढ़ सकता है। इसलिए जिम्मेदारियां निभाने के साथ खुद की जरूरतों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
खुद का ख्याल रखना स्वार्थ नहीं
अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देने और स्वार्थी होने में फर्क है। स्वार्थ में व्यक्ति केवल अपने हित के बारे में सोचता है और दूसरों की परवाह नहीं करता। वहीं आत्म-देखभाल का मतलब अपनी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझना और उनका ख्याल रखना है।
पर्याप्त नींद लेना, समय पर खाना खाना, स्वास्थ्य पर ध्यान देना, आराम करना और अपनी पसंद या रुचियों के लिए समय निकालना भी जरूरी है। जब शरीर और मन स्वस्थ रहते हैं, तभी व्यक्ति लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा पाता है और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर सकता है।
पहचानें कि आपके लिए क्या जरूरी है
अपने लिए समय निकालने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी वास्तविक जरूरतें क्या हैं। हर इच्छा को जरूरत मानना जरूरी नहीं है और न ही समाज या आसपास के लोगों की हर अपेक्षा को पूरा करना आपकी जिम्मेदारी है।
कई बार हम दूसरों को देखकर अपनी जिंदगी की तुलना करने लगते हैं। तकनीक और सामाजिक माध्यमों ने इस आदत को और बढ़ाया है। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में हमें किस चीज की जरूरत है और किस चीज का दबाव हम केवल दूसरों को देखकर महसूस कर रहे हैं।
जो आपकी शांति छीन रहा है, उस पर दोबारा सोचें
अगर कोई काम लगातार आपके समय, स्वास्थ्य या मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा है, तो उसके बारे में दोबारा विचार करना गलत नहीं है। हर जिम्मेदारी को निभाना जरूरी हो सकता है, लेकिन हर अपेक्षा पूरी करना जरूरी नहीं।
अपने दिन में थोड़ा समय ऐसी चीजों के लिए निकालें, जिससे आपको आराम मिले या मन को अच्छा महसूस हो। यह समय बहुत लंबा होना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि दिनभर की जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए भी कुछ जगह बनी रहे।
अपनी प्राथमिकताओं में खुद को भी रखें
जीवन सिर्फ जिम्मेदारियां पूरी करने का नाम नहीं है। परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने स्वास्थ्य, समय और मानसिक शांति का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ खुद की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अपनी प्राथमिकताओं में खुद को शामिल करना स्वार्थ नहीं, बल्कि संतुलित जीवन की जरूरत है।