अमरीका और ईरान के दरमियान जारी फ़ौजी रंजिश एक बार फिर बेहद ख़ौफ़नाक मोड़ पर पहुँच चुकी है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में अमरीकी फ़ौज ने ईरानी द्वीप पर भीषण हमले किए, तो जवाब में तेहरान की तरफ़ से भी करारा पलटवार किया गया। दोनों देशों के बीच शुरू हुए इस ताज़ा सैन्य टकराव का सीधा और भयानक असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार (ग्लोबल एनर्जी मार्केट) पर देखने को मिला है, जहाँ कच्चे तेल (Crude Oil) की क़ीमतों में अचानक ज़बरदस्त उछाल आ गया है।
होर्मुज़ स्ट्रेट में बारूद की गूँज: $90 के पार पहुँचा ब्रेंट क्रूड
अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के सबब (कारण) अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें एक बार फिर बेक़ाबू होने लगी हैं।
- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): लगभग 3 फ़ीसदी की ज़बरदस्त तेज़ी के साथ एक बार फिर 90.15 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।
- WTI क्रूड (US West Texas Intermediate): इसमें भी तेज़ी दर्ज की गई और यह 85.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
- मुरबान क्रूड (Murban Crude): 4 फ़ीसदी से ज़्यादा की भारी तेज़ी के साथ 95.75 डॉलर के स्तर पर पहुँच गया।
दुनिया की कुल तेल आपूर्ति (सप्लाई) का तक़रीबन 20 फ़ीसदी हिस्सा इसी होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते गुज़रता है। ऐसे में इस रणनीतिक (स्ट्रैटेजिक) रास्ते पर हमले के बाद समुद्री जहाज़ों की आवाजाही ठप होने की आशंका से तेल बाज़ार में अफ़रा-तफ़री का माहौल है।
इंसानियत और अर्थव्यवस्था पर ख़ौफ़ के बादल
अमरीका और ईरान के बीच यह जंग अब अपने छठे महीने में दाख़िल हो चुकी है। इससे पहले अप्रैल महीने में जब होर्मुज़ स्ट्रेट का रास्ता प्रभावित हुआ था, तब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुँच गया था, जिससे भारत, ब्रिटेन, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की क़ीमतों पर भारी महँगाई की मार पड़ी थी। अब एक बार फिर वही ख़ौफ़नाक मंज़र दोहराए जाने का डर सता रहा है।
| क्रूड ऑइल का प्रकार | ताज़ा क़ीमत (प्रति बैरल) | बाज़ार में तेज़ी (उछाल) |
| Brent Crude | $90.15 | ~3% |
| WTI Crude | $85.20 | ~2% |
| Murban Crude | $95.75 | >4% |
आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?
भारत अपनी ज़रूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात (Import) करता है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक:
- अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की भी बढ़ोतरी होती है, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीज़ल के दाम 50 से 60 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।
- क्रूड महंगा होने से देश का ‘इंपोर्ट बिल’ बढ़ता है और ज़्यादा डॉलर ख़र्च करने पड़ते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आता है और रोज़मर्रा के सामान महंगे हो जाते हैं।
अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शुरू हुआ यह ताज़ा टकराव कब थमेगा या फिर यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को महँगाई के एक नए बवंडर में ढकेल देगा।