जापान अपनी खूबसूरत वादियों, फूजी पर्वत और चेरी ब्लॉसम के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन इसी देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां धरती से उबलता पानी, सल्फर की गैस और धुएं के गुबार निकलते हैं। इस जगह का नाम ओवाकुदानी (Owakudani) है. इसे जापान की ‘नर्क की घाटी’ भी कहा जाता है. यहां मिलने वाले काले अंडे पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र हैं।
जमीन से निकलता है उबलता पानी और सल्फर की गैस
ओवाकुदानी जापान के कानागावा प्रान्त के हाकोने इलाके में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र है। यहां जमीन के भीतर मौजूद भू-तापीय गतिविधियों के कारण गर्म पानी, भाप और सल्फर गैसें बाहर निकलती रहती हैं। कई जगहों पर धरती से निकलता धुआं और सल्फर की तेज गंध इस इलाके को बेहद रहस्यमयी और डरावना बना देती है।
‘ओवाकुदानी’ का अर्थ जापानी भाषा में ‘ग्रेट बॉयलिंग वैली’ यानी विशाल उबलती घाटी माना जाता है. यहां का ज्वालामुखीय परिदृश्य इसे जापान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।
आखिर क्या हैं ये ‘काले अंडे’?
ओवाकुदानी की सबसे प्रसिद्ध चीजों में कुरो-तामागो (Kuro-Tamago) यानी ‘काले अंडे’ शामिल हैं. ये कोई अलग प्रजाति के अंडे नहीं होते, बल्कि सामान्य मुर्गी के अंडे ही होते हैं।
इन अंडों को ओवाकुदानी के प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों में उबाला जाता है. ज्वालामुखीय पानी में मौजूद सल्फर और लोहे के कारण अंडे के छिलके पर रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और उसका बाहरी हिस्सा काला पड़ जाता है. हालांकि छिलके के अंदर मौजूद अंडा सामान्य रूप से सफेद ही रहता है।
एक काला अंडा खाने से 7 साल बढ़ती है उम्र?
ओवाकुदानी के काले अंडों को लेकर जापान में एक लोकप्रिय मान्यता है कि एक काला अंडा खाने से उम्र सात साल बढ़ जाती है. इसी मान्यता के कारण यहां आने वाले कई पर्यटक इन अंडों को जरूर खाते हैं।
हालांकि, उम्र सात साल बढ़ने वाली बात लोकप्रिय स्थानीय मान्यता और परंपरा है, वैज्ञानिक रूप से साबित तथ्य नहीं. यही वजह है कि इसे अंडे से जुड़ी धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यता के तौर पर देखा जाता है।
करीब 3,000 साल पुरानी है इस घाटी की कहानी
ओवाकुदानी का वर्तमान भू-दृश्य करीब 3,000 साल पहले हाकोने ज्वालामुखी में हुई बड़ी ज्वालामुखीय गतिविधि से जुड़ा माना जाता है. इस दौरान बड़े पैमाने पर विस्फोट हुआ और आसपास के इलाके में भारी भूगर्भीय बदलाव हुए।
आज भी इस क्षेत्र में गर्म पानी और सल्फरयुक्त गैसों का निकलना बताता है कि हाकोने ज्वालामुखीय क्षेत्र पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है। इसी कारण यहां पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखी जाती है।
संत कोबो दाइशी से जुड़ी है करीब 1,000 साल पुरानी मान्यता
ओवाकुदानी से जुड़ी एक प्राचीन धार्मिक कथा भी काफी लोकप्रिय है. मान्यता के अनुसार, करीब एक हजार साल पहले प्रसिद्ध जापानी बौद्ध संत कोबो दाइशी इस इलाके में पहुंचे थे।
उबलती धरती और धुएं से भरे वातावरण को देखकर उन्होंने इसे बेहद भयावह स्थान माना. स्थानीय मान्यता के अनुसार, उन्होंने लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना की। इसी परंपरा से यहां मौजूद एनमेई-जिजो की धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।
आज भी कई पर्यटक इस स्थान पर लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना लेकर पहुंचते हैं.
2015 में सुरक्षा के कारण बंद कर दी गई थी ओवाकुदानी
ओवाकुदानी का इलाका सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र होने के कारण समय-समय पर सुरक्षा कारणों से बंद किया जाता रहा है।मई 2015 में ज्वालामुखीय गतिविधि बढ़ने के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही रोक दी गई थी।
बाद में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद 27 अप्रैल 2016 को पर्यटकों के लिए इसे फिर से खोला गया। हालांकि, ज्वालामुखीय गैसों और अचानक बदलने वाली परिस्थितियों के कारण कुछ इलाकों में आज भी प्रवेश प्रतिबंधित किया जा सकता है।
क्यों दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है ये जगह?
ओवाकुदानी में एक ही जगह पर प्रकृति के कई अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं। कहीं जमीन से भाप निकलती है तो कहीं गर्म पानी के स्रोत नजर आते हैं. चारों तरफ सल्फर की गंध और ज्वालामुखीय चट्टानों का दृश्य इसे बेहद अनोखा बनाता है।
लेकिन इस जगह की सबसे बड़ी पहचान इसके काले अंडे हैं। सात साल लंबी उम्र वाली मान्यता ने इन्हें जापान के सबसे चर्चित स्थानीय खाद्य आकर्षणों में शामिल कर दिया है।
यानी ओवाकुदानी की कहानी सिर्फ डरावनी ‘नर्क की घाटी’ की नहीं, बल्कि ज्वालामुखी, विज्ञान, आस्था और सदियों पुरानी लोक मान्यताओं के अनोखे मेल की कहानी है।