अम्मान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में बदलता दिख रहा है। रविवार, 30 अगस्त 2026 को अमेरिका की ओर से ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मुताबिक, जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं।
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से जारी फुटेज के हवाले से बताया कि दोनों अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बुनियादी ढांचे और लड़ाकू विमानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, अल अरबिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरानी मिसाइल प्रक्षेपकों को नाकाम कर दिया।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का जवाब
ईरान की यह कार्रवाई लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद हुई। ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार, लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला दो चरणों में किया गया था। इस हमले में कई लोगों के मारे जाने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी दी गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के खिलाफ नाकाबंदी जारी है। रविवार तक अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने नाकाबंदी लागू करने के दौरान 83 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर कब्जा किया।
अमेरिकी नाकाबंदी के बीच अरब सागर में भी कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि जब यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक जहाज ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी लागू करने के लिए अरब सागर में आगे बढ़ रहा था, तब एक अमेरिकी नौसैनिक ने एमएच-60एस सी हॉक हेलीकॉप्टर को जहाज के उड़ान डेक पर उतारने का निर्देश दिया।
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, 30 अगस्त तक उसकी सेनाओं ने नाकाबंदी का पालन सुनिश्चित करने के लिए 83 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला, तीन को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर सवार होकर कार्रवाई की।
IRGC ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया ‘बड़ी भूल’
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता और जनसंपर्क प्रमुख हुसैन मोहेबी ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी भूल बताते हुए कहा कि आर्थिक युद्ध के दौरान ट्रंप सरकार की यह कार्रवाई रणनीतिक और घातक गलती थी।
मोहेबी के मुताबिक, इस फैसले से स्थिति का संतुलन अमेरिकी योजनाकारों के खिलाफ जा सकता है और इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि इस गलत अनुमान के लिए अमेरिका को आर्थिक और सैन्य, दोनों मोर्चों पर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
24 अगस्त को शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’
ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की पृष्ठभूमि में 24 अगस्त 2026 को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की ओर से ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू करने की घोषणा की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य ईरान के वैश्विक वित्तीय नेटवर्क और शासन के राजस्व स्रोतों को खत्म करना बताया गया है।
अमेरिका के हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी मिसाइल कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज होने के साथ क्षेत्र में संघर्ष के और फैलने की आशंका भी बनी हुई है।