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मां का ऐसा दर्द जिसने दुनिया को रुला दिया, 6 दिन तक मृत बच्चे को सीने से लगाए तैरती रही डॉल्फिन; झुंड ने भी नहीं छोड़ा साथ

नई दिल्ली: मां और उसके बच्चे का रिश्ता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, इसका मार्मिक उदाहरण हिंद महासागर से सामने आया है। यहां फ्रैगल नाम की एक मां डॉल्फिन अपने महज दो सप्ताह के मृत बच्चे को छह दिनों तक अपने साथ लेकर तैरती रही। इस दौरान उसने एक पल के लिए भी अपने बच्चे को अपने से अलग नहीं किया। ऑस्ट्रेलिया की संस्था जियोग्राफ मरीन रिसर्च ने इस पूरे घटनाक्रम को ड्रोन कैमरे में रिकॉर्ड किया, जिसका वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर के लोग भावुक हो गए।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि फ्रैगल लगातार अपने मृत शावक को संभाले हुए समुद्र में तैर रही है। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर दिया और बड़ी संख्या में लोगों ने इसे मां के असीम प्रेम और गहरे शोक का प्रतीक बताया।

दो सप्ताह का था शावक, छह दिन तक नहीं किया अलग

जानकारी के मुताबिक फ्रैगल का शावक जन्म के केवल 14 दिन बाद ही मर गया था। इसके बावजूद मां डॉल्फिन ने उसे छह दिनों तक अपने साथ रखा और लगातार समुद्र में तैरती रही। शोधकर्ताओं के अनुसार फ्रैगल के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी वह अपने चार बच्चों को खो चुकी है और इस गहरे दर्द का सामना कर चुकी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार भी शावक की मौत के बाद फ्रैगल ने उसे छोड़ने से इनकार कर दिया। यह व्यवहार डॉल्फिन और व्हेल जैसी समुद्री प्रजातियों में पहले भी देखा गया है, जहां मां अपने मृत बच्चे को कई दिनों तक अपने साथ लेकर चलती है।

मुश्किल वक्त में पूरा झुंड बना सहारा

वीडियो में यह भी देखा गया कि फ्रैगल इस कठिन समय में अकेली नहीं थी। डॉल्फिनों का पूरा झुंड उसके साथ लगातार तैरता रहा। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह व्यवहार सामाजिक जुड़ाव और समूह के सहयोग का संकेत माना जाता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्री स्तनधारियों में शोक से जुड़ा ऐसा व्यवहार पहले भी कई बार दर्ज किया जा चुका है। विशेष रूप से डॉल्फिन और व्हेल अपनी संतान की मृत्यु के बाद लंबे समय तक उसके साथ रहने की प्रवृत्ति दिखाती हैं।

वीडियो ने लोगों को किया भावुक

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दीं। एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि जानवरों में भी भावनाएं होती हैं और वे भी अपनों को खोने का दर्द महसूस करते हैं। दूसरे ने लिखा कि पूरे झुंड का फ्रैगल के साथ बने रहना दिखाता है कि डॉल्फिन बेहद संवेदनशील जीव हैं।

एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि यह दृश्य साबित करता है कि शोक सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। वहीं कई लोगों ने जानवरों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की बात भी कही।

 

vineet verma

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