नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत से सामने आई एक भावुक घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। एक बुजुर्ग की वृद्धाश्रम में मौत हो गई, लेकिन उनकी अंतिम विदाई में उनकी तीनों बेटियों में से कोई भी शामिल नहीं हुई। वृद्धाश्रम के अनुसार, बेटियों ने अंतिम संस्कार के लिए 5,100 रुपये भेजे और अंतिम संस्कार का वीडियो मोबाइल पर भेजने का अनुरोध किया। इसके बाद वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया। घटना के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
बताया गया कि बुजुर्ग कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता लंबे समय से अस्वस्थ थे और अपने अंतिम दिनों में वृद्धाश्रम में रह रहे थे। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, वह आखिरी समय तक अपनी बेटियों से मिलने की इच्छा जताते रहे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
वृद्धाश्रम प्रशासन के अनुसार, बुजुर्ग की मौत की सूचना उनकी तीनों बेटियों को दी गई थी। इसके बावजूद वे न तो वृद्धाश्रम पहुंचीं और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। प्रशासन का कहना है कि बेटियों ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 5,100 रुपये भेजे और फोन पर अंतिम संस्कार का वीडियो उपलब्ध कराने को कहा।
इसके बाद वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कराईं।
वृद्धाश्रम के प्रशासक आनंद कुमार के अनुसार, शिवचरण रतन गुप्ता ने अपनी बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया था। उन्होंने अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ने का अवसर दिया। बताया गया कि उनकी दो बेटियां बाद में शिक्षिका बनीं।
वृद्धाश्रम में उनके साथ रहने वाले लोगों का कहना है कि वह अपनी बेटियों की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व जताते थे और मानते थे कि उन्होंने एक पिता के रूप में अपना हर कर्तव्य निभाया है।
प्रशासक आनंद कुमार ने बताया कि बुजुर्ग अक्सर अपनी बेटियों से मिलने की इच्छा व्यक्त करते थे और उम्मीद करते थे कि वे उनसे मिलने आएंगी। हालांकि अंतिम समय तक उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
घटना के सामने आए वीडियो में बुजुर्ग की तस्वीर के साथ अंतिम संस्कार की रस्में निभाते स्थानीय लोग दिखाई देते हैं। एक अन्य दृश्य में बेटियां वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखती नजर आती हैं।
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे बुजुर्गों के बढ़ते अकेलेपन और बदलते पारिवारिक रिश्तों की तस्वीर बताया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि जीवन के सबसे कठिन समय में अपनों का साथ सबसे अधिक मायने रखता है।
हालांकि इस पूरे मामले पर बेटियों की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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