नई दिल्ली: सावन माह की शिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी पर्वों में से एक माना जाता है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है, लेकिन सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व विशेष होता है। इस दिन बड़ी संख्या में शिवभक्त व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का पूजन और जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा से लौटे श्रद्धालु भी शिवालयों में जल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक बेलपत्र और जल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि कब मनाई जाएगी, जलाभिषेक का शुभ समय क्या रहेगा और पूजा की संपूर्ण विधि क्या है।
कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि?
पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को सुबह 4 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होगी। यह तिथि 12 अगस्त को रात 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। चूंकि शिवरात्रि का पूजन रात्रि में किया जाता है, इसलिए सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।
सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
निशीथ काल पूजा का समय 12 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
चार प्रहर पूजा का समय
प्रथम प्रहर: शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक।
द्वितीय प्रहर: रात 9 बजकर 45 मिनट से रात्रि 12 बजकर 26 मिनट तक।
तृतीय प्रहर: रात्रि 12 बजकर 26 मिनट से सुबह 3 बजकर 7 मिनट तक।
चतुर्थ प्रहर: सुबह 3 बजकर 7 मिनट से सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक।
सावन शिवरात्रि की पूजा विधि
सावन शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा स्थल और स्वयं पर गंगाजल का छिड़काव करें। भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दही, गंगाजल, शहद, कच्चा दूध और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के दौरान लगातार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें।
इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और चंदन का तिलक लगाएं। माता पार्वती को कुमकुम अर्पित कर सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष रखें।
फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करने के बाद शिव चालीसा तथा सावन शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर पूजा संपन्न करें तथा प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित करें।