नई दिल्ली: भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में देवताओं का शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला का जनक माना जाता है। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर कारखानों, दुकानों, कार्यस्थलों और प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और दूसरे उपकरणों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से कार्यक्षेत्र में सफलता, उन्नति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बिहार, बंगाल और झारखंड समेत देश के कई राज्यों में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा, जिसे पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की सही तारीख और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाई जाएगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा।
वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना विशेष शुभ माना गया है।
विश्वकर्मा पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
पूजा के लिए भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, नवग्रह, मिट्टी का कलश, जनेऊ, हल्दी, रोली, अक्षत, सुपारी, मौली, लौंग, कपूर, देसी घी, हवन कुंड और आम की लकड़ी की जरूरत होती है।
इसके अलावा गंगाजल, इलायची, सूखा गोला, जटा वाला नारियल, फल, मिठाई, इत्र, दही, खीरा, शहद और पंचमेवा समेत अन्य पूजन सामग्री भी रखी जाती है।
कैसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा? जानें पूरी विधि
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले पूजा स्थल और कार्यस्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करके दीपक जलाएं।
भगवान को रोली, अक्षत, फूल, माला, फल, मिठाई और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गंगाजल से प्रतिमा का अभिषेक करें और वस्त्र, पुष्प व चंदन अर्पित करें।
कार्यस्थल पर मौजूद मशीनों, औजारों, वाहनों और दूसरे उपकरणों को भी साफ करें। उन पर रोली और अक्षत लगाकर फूल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा के साथ आरती करें।
पूजा पूरी होने के बाद भगवान को भोग लगाएं और परिवार के सदस्यों तथा कर्मचारियों में प्रसाद वितरित करें।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का कर सकते हैं जाप
विश्वकर्मा पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए इन मंत्रों का जाप किया जाता है—
- ओम आधार शक्तपे नम:।
- ओम् कूमयि नम:।
- ओम अनन्तम नम:।
- पृथिव्यै नम:।
- ॐ धराधराय नमः
- ॐ स्थूतिस्माय नमः
- ॐ विश्वरक्षकाय नमः
- ॐ दुर्लभाय नमः
- ॐ स्वर्गलोकाय नमः
- ॐ पंचवकत्राय नमः
- ॐ विश्वलल्लभाय नमः
- ॐ धार्मिणे नमः
भगवान विश्वकर्मा की आरती
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा।। 1।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई।। 3।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना।। 4।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी।। 5।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे।। 6।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे।। 7।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे।। 8।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।