श्रीनगर: कश्मीर घाटी में आतंकवाद ने एक बार फिर खौफनाक दस्तक दी है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में ईंट भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। 21 महीनों बाद किसी ईंट भट्ठे पर गैर-कश्मीरी मजदूरों को निशाना बनाए जाने की इस वारदात ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 10 दिनों के भीतर यह दूसरी टारगेट किलिंग है, जिसमें अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है।
घाटी में लगातार हो रही लक्षित हत्याओं ने एक बार फिर उन घटनाओं की याद ताजा कर दी है, जब 2019 और 2021 के दौरान रोजी-रोटी कमाने आए बाहरी मजदूर आतंकियों के निशाने पर थे। ताजा हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और ईंट भट्ठों व निर्माण स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
ईंट भट्ठे पर बरसी गोलियां, दो मजदूरों की मौत
ताजा हमला दक्षिण कश्मीर के केल्लम (किलम) इलाके में स्थित एक ईंट भट्ठे पर हुआ। शुक्रवार देर शाम दिनभर का काम खत्म होने के बाद मजदूर आराम कर रहे थे, तभी आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
छत्तीसगढ़ के रहने वाले दीपक रात्रे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपिंदर को पहले जीएमसी अनंतनाग और बाद में हालत बिगड़ने पर श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस (सौरा) रेफर किया गया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान भूपिंदर ने भी दम तोड़ दिया।
10 दिनों में तीन लोगों की गई जान
आतंकियों का निशाना सिर्फ प्रवासी मजदूर ही नहीं बने हैं। इससे पहले दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एक स्थानीय पुलिस अधिकारी की बेहद करीब से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
बीते 10 दिनों के भीतर हुई इन दो घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठन आम नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और गैर-कश्मीरी लोगों में भय का माहौल पैदा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
गैर-कश्मीरी मजदूरों पर कब-कब हुए बड़े हमले?
कश्मीर में काम करने पहुंचे बाहरी मजदूर पहले भी कई बार आतंकियों के निशाने पर रहे हैं।
- 31 जुलाई 2026: कुलगाम के ईंट भट्ठे पर हमला, छत्तीसगढ़ के दीपक रात्रे और भूपिंदर की हत्या।
- 21 अक्टूबर 2024: गांदरबल के सोनमर्ग में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर हमला, एक स्थानीय डॉक्टर समेत सात लोगों की मौत।
- 7 फरवरी 2024: श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में पंजाब के दो मजदूर अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की हत्या।
- 17 अक्टूबर 2021: कुलगाम में बिहार के दो प्रवासी श्रमिकों की गोली मारकर हत्या।
- 29 अक्टूबर 2019: कुलगाम के कटरोसू गांव में पश्चिम बंगाल के पांच मजदूरों की निर्मम हत्या।
आखिर क्यों बढ़ती हैं टारगेट किलिंग की घटनाएं?
सुरक्षा और रक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक, प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने के पीछे आतंकियों की सुनियोजित रणनीति होती है।
पहला कारण यह है कि ईंट भट्ठों, निर्माण स्थलों और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले मजदूर अपेक्षाकृत कम सुरक्षा वाले स्थानों पर रहते हैं, जिससे वे आसान निशाना बन जाते हैं।
दूसरा, जब घाटी में विकास कार्य तेज होते हैं, पर्यटन बढ़ता है और सामान्य स्थिति बहाल होने लगती है, तब आतंकी संगठन ऐसी घटनाओं के जरिए आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने और बाहरी कामगारों में डर पैदा करने की कोशिश करते हैं।
तीसरा, सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से कमजोर पड़ चुके आतंकी नेटवर्क अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ऐसी कायराना वारदातों को अंजाम देते हैं।
सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
कुलगाम और अनंतनाग की घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इसके साथ ही घाटी में मौजूद सभी ईंट भट्ठों, निर्माण परियोजनाओं और प्रवासी मजदूरों के ठिकानों का सुरक्षा ऑडिट कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।