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सुभाष चंद्रा के ₹22,006 करोड़ कर्ज केस में नया ट्विस्ट, NCLT के फैसले के खिलाफ NCLAT पहुंचेगा HDFC Bank और LICHFL

news desk
Last updated: August 28, 2026 8:58 am
news desk
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नई दिल्ली: ज़ी ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े करीब 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज विवाद में अब कानूनी लड़ाई और तेज होती दिख रही है। दिल्ली स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जहां एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के कर्ज निपटारे के लिए पेश किए गए सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दे दी, वहीं इस फैसले से कुछ बड़े वित्तीय संस्थान संतुष्ट नहीं हैं। HDFC Bank और LIC Housing Finance (LICHFL) अब NCLAT का रुख करने की तैयारी में हैं।

Contents
₹22,006 करोड़ के कर्ज पर NCLT की मंजूरी80.8% लेनदारों ने किया प्लान का समर्थनHDFC Bank ने जताई आपत्तिLICHFL भी NCLAT जाने की तैयारी मेंअब NCLAT में होगी अगली लड़ाई

₹22,006 करोड़ के कर्ज पर NCLT की मंजूरी

मामला एस्सेल ग्रुप की कंपनियों पर बकाया करीब ₹22,006 करोड़ के कर्ज से जुड़ा है। इस मामले में सुभाष चंद्रा ने निजी गारंटर के तौर पर जिम्मेदारी ली थी।

NCLT से मंजूर प्रस्ताव के मुताबिक मुख्य कर्जदारों से करीब ₹1,494 करोड़ की वसूली का प्रावधान है। वहीं, निजी गारंटर के तौर पर सुभाष चंद्रा की ओर से महज ₹6.25 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव रखा गया है।

यही रकम अब विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गई है। कर्जदाताओं का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि इतने बड़े क्लेम के मुकाबले इतनी कम रकम की वसूली को किस आधार पर स्वीकार किया गया।

80.8% लेनदारों ने किया प्लान का समर्थन

हालांकि, सेटलमेंट प्लान को कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) में मजबूत समर्थन मिला। वोटिंग में करीब 80.8 फीसदी लेनदारों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसके बावजूद कुछ बड़े वित्तीय संस्थानों ने अपनी आपत्ति बरकरार रखी है।

यानी एक तरफ NCLT ने कर्ज निपटारे की योजना को मंजूरी दे दी है, तो दूसरी तरफ असंतुष्ट कर्जदाता अब इस फैसले को अपीलीय मंच पर चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

HDFC Bank ने जताई आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक HDFC Bank ने सेटलमेंट प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। बैंक अब NCLAT में अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

बैंक का रुख इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि NCLT की मंजूरी के बावजूद विरोध करने वाले वित्तीय संस्थान अब इस बात को ऊपरी न्यायिक मंच के सामने रख सकते हैं कि कर्ज की वसूली के लिए तय रकम पर्याप्त है या नहीं।

LICHFL भी NCLAT जाने की तैयारी में

LIC Housing Finance (LICHFL) ने भी इस फैसले के खिलाफ NCLAT जाने का फैसला किया है। कंपनी का तर्क है कि करीब ₹22,006 करोड़ के दावे के मुकाबले सिर्फ ₹6.25 करोड़ का भुगतान स्वीकार करना उचित नहीं है।

LICHFL इस मामले में National Housing Bank (NHB) से भी हस्तक्षेप की मांग कर सकती है।

अब NCLAT में होगी अगली लड़ाई

NCLT के फैसले के बाद अब पूरा मामला अगले कानूनी पड़ाव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगर HDFC Bank और LICHFL NCLAT में अपील दाखिल करते हैं, तो वहां इस बात पर सुनवाई हो सकती है कि सुभाष चंद्रा से जुड़े निजी गारंटी मामले में तय सेटलमेंट रकम और पूरी प्रक्रिया कानूनी तौर पर कितनी उचित है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ₹22 हजार करोड़ से ज्यादा के कर्ज विवाद में ₹6.25 करोड़ का भुगतान स्वीकार किया जाना चाहिए? NCLAT का अगला रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।

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TAGGED: 1494 करोड़ recovery, 22006 करोड़ कर्ज, 6.25 करोड़ भुगतान, CoC, Committee of Creditors, Essel Group Debt, Essel Group Settlement, HDFC Bank, LIC Housing Finance, LICHFL, NCLAT, NCLT, Subhash Chandra Loan Case, Subhash Chandra Settlement Plan, Zee Chairman Subhash Chandra, सुभाष चंद्रा कर्ज मामला
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