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प्रयागराज में करोड़ों की जमीन का खेल: फर्जी रजिस्ट्री के सहारे दाखिल-खारिज, एसडीएम सदर पर गंभीर आरोप

प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में करोड़ों रुपये की सरकारी और निजी जमीन से जुड़े एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है।

आरोप है कि एसडीएम सदर और उनकी टीम ने भू-माफियाओं की मिलीभगत से करीब 15 बीघा जमीन पर बड़ा खेल किया। यह पूरा मामला एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के भीटी तालुका असदुल्लापुर से जुड़ा बताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक विवादित जमीन आराजी संख्या 161, 165, 209, 322, 327, 330, 333, 334, 345, 360, 361, 494, 207 और 344 सहित कुल 14 गाटों की है, जो लगभग 15 बीघा क्षेत्रफल में फैली हुई है। यह जमीन मूल रूप से अलीम उद्दीन और अन्य के नाम दर्ज थी।

जानकारी के अनुसार अलीम उद्दीन की मृत्यु वर्ष 1968 में हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी फातमा बीबी का नाम खतौनी में दर्ज हुआ। आरोप है कि फातमा बीबी ने वर्ष 1971 में यह जमीन वैध रूप से बेच दी थी, जिस पर लंबे समय से लोगों का कब्जा और दखल है।

इसके बावजूद भू-माफियाओं द्वारा वर्ष 1974 की एक कथित फर्जी रजिस्ट्री तैयार कराई गई। आरोप है कि माफिया अतीक अहमद के करीबी बताए जा रहे शोएब, वदूद, जैद जुआरी और मकबूल ने जिल्द संख्या-1, जिल्द नंबर 1623, पन्ना 260-261, क्रमांक 1271 का हवाला देकर नफीस अहमद के नाम रजिस्ट्री कराई, जबकि उस जिल्द बही में नोखे लाल और मोती लाल के नाम दर्ज बताए जाते हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस रजिस्ट्री को वर्ष 1974 की बताया जा रहा है, उसका स्टांप वर्ष 1975 में खरीदा गया दिखाया गया है, यानी रजिस्ट्री पहले और स्टांप बाद में, जो सीधे तौर पर दस्तावेजों की कूटरचना की ओर इशारा करता है।

आरोप है कि इसी फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर करीब 50 साल बाद, दिनांक 25 जुलाई 2025 को एसडीएम सदर कोर्ट में दाखिल-खारिज का वाद दाखिल किया गया। एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर और रजिस्ट्रार कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर कथित तौर पर पुराने काश्तकारों के नाम काटते हुए दाखिल-खारिज का आदेश पारित कर दिया गया।

इतना ही नहीं, आरोप है कि दाखिल-खारिज के बाद करोड़ों की इस जमीन को मात्र 20 लाख रुपये में एसडीएम सदर द्वारा अपने करीबी बताए जा रहे लखनऊ निवासी शिवंकर राज के नाम एग्रीमेंट करवा दिया गया। आरोपों के अनुसार यह एग्रीमेंट सिर्फ 20 हजार रुपये में किया गया।

एग्रीमेंट में एसडीएम सदर अभिषेक सिंह के कथित लेन-देन देखने वाले प्रमोद सिंह यादव को गवाह बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

news desk

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