Trending News

वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे: प्रेग्नेंसी में बीपी की अनदेखी पड़ सकती है भारी, मां और बच्चे दोनों को बड़ा खतरा

हर साल 17 मई को दुनियाभर में ‘वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे’ (विश्व उच्च रक्तचाप दिवस) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर (बीपी) चेक कराने के प्रति जागरूक करना है।

इस बार की थीम “कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर” रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि बीपी को नियंत्रित रखना सिर्फ मरीज ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और हेल्थकेयर सिस्टम की भी साझा जिम्मेदारी है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए बीपी की जांच एक जीवन रक्षक साबित हो सकती है।

जयपुर के कोकून हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट (ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) डॉक्टर प्रिया गुप्ता का कहना है कि “प्रेग्नेंसी में अपने बीपी का सही नंबर जानना केवल हाइपरटेंशन कंट्रोल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और बच्चे दोनों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।”

प्रेग्नेंसी में बीपी पर नजर रखना क्यों है जरूरी?

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ एक सामान्य या अस्थायी बदलाव नहीं है। यह जेस्टेशनल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है, जो आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 20 हफ्तों के बाद उभरता है।

साइलेंट लक्षण: इसके शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। महिलाओं को आमतौर पर केवल सिरदर्द, शरीर में सूजन या अत्यधिक थकान महसूस होती है, जिसे वे सामान्य समझ बैठती हैं।

चिंता बढ़ाते आंकड़े

दुनियाभर में अरबों लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं और चौंकाने वाली बात यह है कि एक बड़ी आबादी को अपनी इस बीमारी का पता ही नहीं होता। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 5 से 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में हाई बीपी की समस्या देखी जाती है, जो डिलीवरी के समय और भविष्य में भी उनकी सेहत के लिए बड़ा जोखिम खड़ी कर सकती है।

प्रेग्नेंसी में बीपी चेकअप को सिर्फ एक रूटीन फॉर्मेलिटी न समझें। यह एंटीनटल केयर (प्रसव पूर्व देखभाल) का सबसे आसान लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।

अनियंत्रित बीपी से होने वाले बड़े खतरे

अगर समय रहते बीपी की मॉनिटरिंग न की जाए, तो इसके बेहद घातक परिणाम हो सकते हैं:

मां पर असरबच्चे पर असर
* ब्रेन, किडनी और लिवर डैमेज का खतरा
* ब्लड क्लॉटिंग सिस्टम में गड़बड़ी
* प्लेसेंटा (गर्भनाल) पर बुरा असर
* गर्भ में बच्चे की ग्रोथ (विकास) रुकना
* जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना
* प्री-मैच्योर या इमरजेंसी डिलीवरी की नौबत

बचाव का एक ही रास्ता: समय पर पहचान

नियमित बीपी मॉनिटरिंग डॉक्टरों को किसी भी संभावित खतरे को इमरजेंसी बनने से पहले पकड़ने में मदद करती है। सही समय पर पहचान होने से डॉक्टर समय रहते जरूरी दवाएं शुरू कर सकते हैं, अतिरिक्त यूरिन व ब्लड टेस्ट कर सकते हैं और एक सुरक्षित डिलीवरी की बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं।

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. indianpresshouse.com किसी तरह का दावा नहीं करता है

news desk

Recent Posts

Vaibhav Suryavanshi: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान, बोले- क्रिकेट से अलग भी करता हूं बात

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लेकर लगातार चर्चा हो…

50 seconds ago

आरनवी का दोहरा खिताब, अभिजय, सांची व तथास्तु ने भी जीते दो-दो खिताब

लखनऊ। आरनवी पाठक ने किरन अग्रवाल मेमोरियल लखनऊ जिला बैडमिंटन चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन करते…

6 minutes ago

Irani Cup: रणजी चैंपियन J&K का डबल का सपना टूटा, मुकेश कुमार के 6 विकेट से Rest of India ने जीता खिताब

रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर का घरेलू क्रिकेट में ‘डबल’ खिताब जीतने का सपना टूट गया।…

59 minutes ago

BJP Rajya Sabha Bypolls: TMC छोड़ने वाली कोयल मल्लिक को BJP ने दिया राज्यसभा टिकट, उत्तराखंड से दिनेश आर्य उम्मीदवार

राज्यसभा उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने…

3 hours ago

Guwahati Nightclub Case: महिला से मारपीट मामले में 7 गिरफ्तार, तय समय के बाद भी क्लब खुला रहने की जांच

असम के गुवाहाटी में एक नाइट क्लब के अंदर महिला के साथ कथित मारपीट और…

5 hours ago

BJP में शामिल होंगे हुमायूं कबीर? अधीर रंजन चौधरी बोले- ‘खुद कहेंगे तभी मानूंगा’

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) प्रमुख हुमायूं कबीर के बीजेपी…

6 hours ago