इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Justice Yashwant Varma ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उनके खिलाफ मार्च 2025 में दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में अधजली नकदी मिलने के मामले के बाद महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने 146 सांसदों के समर्थन से प्रस्ताव स्वीकार करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जो फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम तब विवादों में आया जब उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी के दौरान जला हुआ कैश बरामद हुआ था। इस घटना के बाद कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था।
इस गंभीर विवाद के चलते उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से वापस उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 5 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी, लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। फिलहाल उनके खिलाफ एक आंतरिक जांच भी जारी है। जानकारों का मानना है कि महाभियोग की जटिल प्रक्रिया और जांच के बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने इस्तीफा देना ही उचित समझा।
जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि ‘कैश कांड’ की आंच काफी गहरी थी। अब सबकी नजरें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जब ओम बिरला द्वारा गठित समिति अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यदि रिपोर्ट में आरोप सिद्ध होते हैं, तो सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
इंडियन स्पिनर युजवेंद्र चहल इस बार क्रिकेट के मैदान पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर…
मौजूदा समय में लगभग हर व्यक्ति सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है और इसके माध्यम…
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता और…
बॉलीवुड के 'खिलाड़ी' अक्षय कुमार इन दिनों अपनी अगली फिल्म 'Bhoot Bangla' को लेकर चर्चा…
नई दिल्ली/लखनऊ: क्रिकेट की दुनिया में सफलता की चकाचौंध के पीछे अक्सर पसीने और आंसुओं…
अगर आप सोच रहे हैं कि बेंगलुरु में ट्रैफिक ही आपका टाइम खराब करता है,…