नई दिल्ली/लखनऊ: क्रिकेट की दुनिया में सफलता की चकाचौंध के पीछे अक्सर पसीने और आंसुओं की एक लंबी दास्तां छिपी होती है। सोमवार, 13 अप्रैल की रात आईपीएल 2026 के मंच पर बिहार के गोपालगंज का एक ऐसा ही ‘हीरा’ चमका, जिसे तराशने के लिए उसकी मां ने अपने गहने तक दांव पर लगा दिए थे।
सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की ओर से अपना डेब्यू कर रहे साकिब हुसैन का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2004 में जन्मे साकिब के पिता अली अहमद हुसैन एक साधारण किसान थे। घर की माली हालत ऐसी थी कि जब साकिब को गेंदबाजी के लिए प्रोफेशनल स्पाइक्स (जूते) की जरूरत पड़ी, तो घर में पैसे नहीं थे। उस वक्त उनकी माँ, सुबुकतारा खातून ने ममता की मिसाल पेश करते हुए अपने गहने बेच दिए ताकि बेटा मैदान पर दौड़ सके। साकिब आज भी उस पल को याद कर भावुक हो जाते हैं।
राजस्थान रॉयल्स, जो लगातार 4 मैच जीतकर अंक तालिका में शीर्ष पर थी और जिसकी बल्लेबाजी को सबसे ‘खतरनाक’ माना जा रहा था, उसे साकिब ने अपनी गेंदों से खामोश कर दिया। अपने स्पेल में मात्र 24 रन देकर 4 अहम विकेट चटकाए और प्रफुल हिंगे (4 विकेट) के साथ मिलकर हैदराबाद को एक ऐसी जीत दिलाई जिसे सालों तक याद रखा जाएगा।
2024 में केकेआर के साथ बेंच पर बैठने और फिर अनसोल्ड होने के बाद, साकिब की किस्मत तब पलटी जब पूर्व तेज गेंदबाज वरुण आरोन ने उन्हें MRH अकादमी में देखा। हैदराबाद ने उन्हें ₹30 लाख में अपने साथ जोड़ा और साकिब ने पहले ही मौके को इतिहास में बदल दिया।
साकिब हुसैन की यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो अभावों के बीच भी हार नहीं मानती। बिहार के गोपालगंज की गलियों से निकलकर आईपीएल के शिखर तक पहुँचना यह बताता है कि अगर मेहनत सच्ची हो, तो किस्मत को झुकना ही पड़ता है।
डेविड धवन अपनी 46वीं फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' के साथ वापस तो…
भारत के संसदीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र…
अगर आप एक फ्लैगशिप स्मार्टफोन खरीदने का प्लान कर रहे थे, लेकिन बजट उसमे आड़े…
नई दिल्ली/लंदन। क्रिकेट की बाइबिल कहे जाने वाले 'विजडन क्रिकेटर्स अल्मनाक' (Wisden Cricketers' Almanack) ने…
बिहार की सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया…
पटना। बिहार की राजनीति में आज एक बड़े अध्याय का समापन हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश…