नई दिल्ली: मेडिटेशन मानसिक शांति, तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने का प्रभावी तरीका माना जाता है। नियमित ध्यान करने से भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। हालांकि, कई लोगों के लिए ध्यान की शुरुआत आसान नहीं होती। कुछ लोगों को जैसे ही वे मेडिटेशन के दौरान आंखें बंद करते हैं, घबराहट, बेचैनी या असुरक्षा महसूस होने लगती है। यह स्थिति सामान्य हो सकती है और इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं।
मेडिटेशन के दौरान आंखें बंद करने पर क्यों होती है घबराहट?
ध्यान के समय आंखें बंद करने पर बाहरी दृश्य संकेत पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। ऐसे में कुछ लोगों के मस्तिष्क को आसपास के वातावरण से मिलने वाली सामान्य जानकारी नहीं मिलती, जिससे सुरक्षा का एहसास कम हो सकता है। इसके कारण बेचैनी, डर या घबराहट जैसी भावनाएं उभर सकती हैं।
इन वजहों से बढ़ सकती है बेचैनी
मेडिटेशन के दौरान मन पूरी तरह शांत होने लगता है, जिससे दबे हुए विचार और भावनाएं अधिक स्पष्ट महसूस होने लगती हैं। सामान्य दिनचर्या की भागदौड़ में जिन बातों पर ध्यान नहीं जाता, वे ध्यान के दौरान सामने आ सकती हैं।
कुछ लोगों में नियंत्रण खोने का डर भी घबराहट की वजह बनता है। वहीं, पहले से मौजूद चिंता, तनाव या पुराने अप्रिय अनुभव भी आंखें बंद करते ही असुरक्षा की भावना पैदा कर सकते हैं। कई बार अंधेरे की स्थिति में मस्तिष्क कल्पनाओं या डर से जुड़े एहसास भी उत्पन्न कर देता है।
घबराहट होने पर क्या करें?
अगर आंखें बंद करते ही बेचैनी महसूस होती है, तो खुद पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है। धीरे-धीरे अभ्यास करने से स्थिति में सुधार आ सकता है।
इन आसान उपायों से मिल सकती है राहत
- शुरुआत में आंखें पूरी तरह बंद करने के बजाय हल्की खुली रखें और सामने किसी एक स्थिर बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें।
- शुरुआती दिनों में केवल 30 सेकंड से 2 मिनट तक ही मेडिटेशन करें और समय धीरे-धीरे बढ़ाएं।
- ऐसी जगह ध्यान करें जहां पर्याप्त रोशनी हो और आप खुद को सुरक्षित महसूस करें।
- ध्यान के दौरान अपनी सांसों, पैरों के जमीन से स्पर्श या शरीर के किसी स्थिर एहसास पर ध्यान केंद्रित करें।
- यदि किसी भी समय घबराहट या बेचैनी बढ़ने लगे, तो तुरंत आंखें खोल लें और सामान्य सांस लेते हुए खुद को सहज होने का समय दें।
धीरे-धीरे अभ्यास से बढ़ सकता है आत्मविश्वास
विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिटेशन का उद्देश्य खुद पर दबाव डालना नहीं बल्कि मन को धीरे-धीरे शांत करना है। इसलिए यदि शुरुआत में आंखें बंद करने में कठिनाई हो रही है, तो अपनी सुविधा के अनुसार अभ्यास करें। नियमित और धैर्यपूर्ण प्रयास से समय के साथ यह असहजता कम हो सकती है।