नई दिल्ली: भारत में सोना खरीदना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि निवेश और पारिवारिक परंपरा का भी हिस्सा है। शादी-ब्याह और दूसरे मौकों पर लोग बड़ी मात्रा में सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर घर में कितना सोना रखा जा सकता है और क्या तय मात्रा से ज्यादा गोल्ड होने पर इनकम टैक्स विभाग उसे जब्त कर सकता है? 500 ग्राम, 250 ग्राम और 100 ग्राम को लेकर भी लोगों के बीच काफी भ्रम है। इन आंकड़ों का असली मतलब समझना जरूरी है।
क्या घर में सोना रखने की कोई तय लिमिट है?
सबसे पहले यह समझ लें कि घर में सोना रखने की कोई तय अधिकतम कानूनी सीमा नहीं है। अगर आपके पास रखा सोना वैध तरीके से खरीदा गया है और आप उसके स्रोत और मालिकाना हक के बारे में संतोषजनक जानकारी दे सकते हैं, तो केवल ज्यादा मात्रा होने की वजह से उसे गैरकानूनी नहीं माना जाता।
यानी असली सवाल यह नहीं है कि आपके पास कितना सोना है, बल्कि यह है कि सोना कहां से आया और उसका मालिक कौन है।
500, 250 और 100 ग्राम का नियम आखिर क्या है?
इनकम टैक्स की तलाशी से जुड़ी चर्चाओं में 500 ग्राम, 250 ग्राम और 100 ग्राम की मात्रा का अक्सर जिक्र होता है। आम तौर पर विवाहित महिला के लिए 500 ग्राम, अविवाहित महिला के लिए 250 ग्राम और परिवार के पुरुष सदस्य के लिए 100 ग्राम ज्वेलरी को ऐसी मात्रा के तौर पर बताया जाता है, जिसे तलाशी के दौरान जब्त नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि ये सोना रखने की कानूनी सीमा नहीं हैं। इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि इससे ज्यादा सोना घर में रखना गैरकानूनी हो जाता है।
500 ग्राम से ज्यादा गोल्ड है तो क्या तुरंत हो जाएगा जब्त?
ऐसा जरूरी नहीं है। अगर आपके पास बताई गई मात्रा से ज्यादा सोना है, तो सिर्फ इसी आधार पर उसे तुरंत जब्त नहीं किया जाता। अगर आप यह स्पष्ट कर सकते हैं कि सोना वैध स्रोत से आया है और उसका मालिकाना हक आपका है, तो मामला अलग हो सकता है।
ऐसे में सोने की खरीद की रसीद, बिल, बैंक लेन-देन का रिकॉर्ड, विरासत से जुड़े दस्तावेज या गिफ्ट में मिले सोने से संबंधित कागजात अहम हो सकते हैं।
घर में रखें या बैंक लॉकर में, ये कागज संभालकर रखें
सोना घर में रखा हो या बैंक लॉकर में, टैक्स के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात उसके स्रोत को साबित करना है। अगर गोल्ड विरासत में मिला है या किसी रिश्तेदार ने उपहार में दिया है, तो उससे जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहतर है।
इसी तरह खरीदी गई ज्वेलरी के बिल और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी संभालकर रखें। इससे जरूरत पड़ने पर सोने के स्रोत और मालिकाना हक को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।