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फैक्ट चेक: क्या देश में फिर लगेगा ‘युद्ध वाला लॉकडाउन’? सोशल मीडिया पर वायरल नोटिस का चौंकाने वाला सच

नई दिल्ली। क्या देश में फिर से लॉकडाउन लग सकता है? क्या सरकार इस पर कोई कदम उठाने जा रही है? ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सोशल मीडिया पर इस तरह के कई मैसेज तेजी से वायरल हो रहे हैं।

इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर ‘वार लॉकडाउन’ के नाम से एक कथित नोटिस भी जमकर शेयर किया जा रहा है। इस नोटिस में इमरजेंसी चेतावनी जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लोग भ्रमित हो रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक कथित ‘सरकारी आदेश’ की पीडीएफ (PDF) तेजी से वायरल हो रही है, जिसने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। इस नोटिस में दावा किया गया है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के मद्देनजर सरकार ने ‘युद्ध-संबंधी लॉकडाउन’ लागू करने का फैसला किया है। हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो जो सच्चाई सामने आई वह हैरान करने वाली है।

वायरल नोटिस में क्या था?


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए जा रहे इस दस्तावेज का लेआउट और भाषा बिल्कुल आधिकारिक सरकारी आदेश जैसी रखी गई है। इसमें नागरिकों से फौरन सावधानी बरतने और लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील की गई। अपनी विश्वसनीय बनावट के कारण, लोग इसे बिना सोचे-समझे एक-दूसरे को फॉरवर्ड करने लगे, जिससे आम जनता के बीच चिंता की स्थिति पैदा हो गई।

क्या है इस ‘लॉकडाउन’ का असली सच?

जब इस वायरल पीडीएफ को खोलकर विस्तार से देखा गया, तो सारा मामला साफ हो गया। इस डॉक्यूमेंट के अंत में किसी सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर के बजाय एक ‘अप्रैल फूल’ (April Fool) का मैसेज और एक हंसता हुआ इमोजी बना था।

मुख्य बातें:

कोई आधिकारिक आदेश नहीं: सरकार या गृह मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

अप्रैल फूल का मजाक: चूंकि आज 1 अप्रैल है, इसलिए किसी शरारती तत्व ने ‘अप्रैल फूल डे’ के मौके पर लोगों को डराने के लिए यह भ्रामक पोस्ट तैयार की।

सरकार का रुख: हाल ही में सरकार ने स्पष्ट किया था कि देश में किसी भी तरह के लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव या विचार विचाराधीन नहीं है।

भ्रामक खबरों से कैसे बचें?

विशेषज्ञों का कहना है कि 1 अप्रैल को सोशल मीडिया पर इस तरह के प्रैंक (मजाक) और भ्रामक खबरें अक्सर बढ़ जाती हैं। किसी भी सरकारी आदेश पर भरोसा करने से पहले ‘प्रेस सूचना ब्यूरो’ (PIB Fact Check) या आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स की जांच जरूर करें।

सावधान: बिना पुष्टि किए किसी भी संवेदनशील पीडीएफ या मैसेज को फॉरवर्ड न करें। यह न केवल अफवाह फैलाता है बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

अगर इस वायरल डॉक्यूमेंट पर गौर करें, तो इसमें अशोक चक्र का चिन्ह लगाकर इसे इस तरह डिजाइन किया गया है, मानो यह कोई आधिकारिक सरकारी नोटिस हो। लेकिन जब लोगों ने इसकी सच्चाई जांची, तो मामला पूरी तरह अलग निकला।

news desk

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