दुबई/तेहरान। मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। जंग कब तक चलेगी, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।
अमेरिका और इजरायल ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के प्रयास में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है और किसी भी हालत में पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष का असर पूरे मिडिल ईस्ट में देखने को मिल रहा है।
हालात ऐसे हैं कि खाड़ी क्षेत्र के कई देश भी इस तनाव की चपेट में हैं। हालांकि, क्षेत्रीय देशों की आधिकारिक स्थिति और रणनीति को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच के ऐतिहासिक मतभेद अब खुलकर युद्ध के मैदान में तब्दील होते दिख रहे हैं।
बुधवार को तीन प्रमुख एयरलाइनों एमिरेट्स (Emirates), एतिहाद (Etihad) और फ्लाई दुबई (flydubai) ने आधिकारिक तौर पर ईरानियों के देश में प्रवेश और ट्रांजिट पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने अमेरिका से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की अपील की है। इसके बदले में अमीरात ने अमेरिका को बड़ी सैन्य सहायता की पेशकश भी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि UAE इस मौके का फायदा उठाकर ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना चाहता है।
ईरान और UAE के बीच इस नफरत की जड़ें 1905 से जुड़ी हैं। विवाद के केंद्र में तीन प्रमुख द्वीप हैं:
1905: ईरान ने इन द्वीपों पर अपना दावा ठोका, लेकिन ब्रिटेन के हस्तक्षेप के कारण वे सफल नहीं हो सके।
30 नवंबर 1971: ब्रिटिश सेना की वापसी के ठीक बाद, ईरान ने सैन्य कार्रवाई कर इन तीनों द्वीपों पर कब्जा कर लिया। तब से UAE इन्हें अपना क्षेत्र मानता है।
ये तीन छोटे द्वीप फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रवेश द्वार पर स्थित हैं। इनका महत्व निम्नलिखित कारणों से अत्यधिक है:
UNSC प्रस्ताव: UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से एक प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश में है ताकि ईरान के खिलाफ कानूनी सैन्य कार्रवाई की जा सके।
वैश्विक गठबंधन: अमीराती राजनयिक अमेरिका, यूरोप और एशिया की शक्तियों को एकजुट कर एक सैन्य गठबंधन बनाने की अपील कर रहे हैं ताकि ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को फिर से खोला जा सके।
UAE का मानना है कि यदि संयुक्त राष्ट्र मंजूरी दे देता है, तो वे देश भी इस गठबंधन में शामिल होंगे जो अभी ईरान के साथ सीधे टकराव से हिचकिचा रहे हैं।
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