क्या इंसान कभी अमर हो सकता है? यह सवाल सदियों से विज्ञान और मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है। अब रूस की एक नई रिसर्च ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है। मॉस्को स्थित स्कोल्कोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इंसान भले अमर न हो सके, लेकिन उसकी उम्र 194 साल तक बढ़ाई जा सकती है।
क्या कहती है नई रिसर्च?
हाल ही में NPG Aging Journal में प्रकाशित इस अध्ययन में गणितीय मॉडल के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि यदि उम्र बढ़ाने वाले जैविक कारणों को नियंत्रित कर लिया जाए, तो इंसान सामान्य आयु से दोगुना जीवन जी सकता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बढ़ती उम्र का सबसे बड़ा कारण DNA में होने वाले सोमैटिक म्यूटेशन हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर इन क्षतियों को ठीक करने में कमजोर पड़ जाता है, जिससे कोशिकाएं बूढ़ी होने लगती हैं।
जीन थेरेपी और एंटी-एजिंग टेक्नोलॉजी
रूस इस दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। “New Technologies for Health Preservation National Project” के तहत वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी विकसित कर रहे हैं जो:
- सेलुलर एजिंग को धीमा कर सके
- DNA स्तर पर बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोक सके
- गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म कर सके
इसके अलावा, बायोप्रिंटिंग और जेनोट्रांसप्लांटेशन जैसी तकनीकों पर भी काम जारी है, जिनसे भविष्य में लैब में मानव अंग तैयार कर प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे।
पुतिन का बयान और ‘अमरता’ की चर्चा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक पुराना बयान भी इस बहस को हवा दे चुका है। चीन में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि मानव अंगों का सफल प्रत्यारोपण संभव हो जाए, तो इंसान लंबे समय तक—यहां तक कि “अमरता” के करीब—जी सकता है।
क्या सच में संभव है अमर होना?
विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है:
- कुछ का मानना है कि यह रिसर्च चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है
- वहीं, कई वैज्ञानिक इसे अभी सैद्धांतिक मानते हैं और ‘अमरता’ को दूर की संभावना बताते हैं
रूस की मजबूरी भी एक वजह?
रूस में औसत आयु पश्चिमी देशों के मुकाबले कम है। ऐसे में एंटी-एजिंग और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर निवेश को देश की स्वास्थ्य नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 26 बिलियन डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।
इंसान की उम्र 194 साल तक बढ़ाने का दावा भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन यह साफ है कि दुनिया तेजी से लॉन्गेविटी साइंस की ओर बढ़ रही है। सवाल अब भी वही है-क्या विज्ञान कभी मौत को मात दे पाएगा, या यह सिर्फ एक लंबी जिंदगी तक ही सीमित रहेगा?