Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: बंदूक उठाकर आजादी की जंग लड़ी, राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे और अब 25 साल की सजा; कौन हैं हाशिम थाची, जिनकी कहानी ने पलटा पूरा रुख?
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > बंदूक उठाकर आजादी की जंग लड़ी, राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे और अब 25 साल की सजा; कौन हैं हाशिम थाची, जिनकी कहानी ने पलटा पूरा रुख?
Trending Newsवर्ल्ड

बंदूक उठाकर आजादी की जंग लड़ी, राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे और अब 25 साल की सजा; कौन हैं हाशिम थाची, जिनकी कहानी ने पलटा पूरा रुख?

vineet verma
Last updated: September 17, 2026 11:54 am
vineet verma
Share
SHARE

प्रिस्टिना: कभी कोसोवो की आजादी की लड़ाई में हथियार उठाने वाले और बाद में देश के राष्ट्रपति बनने वाले हाशिम थाची अब युद्ध अपराध के मामले में 25 साल की जेल की सजा भुगतेंगे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें हत्या, प्रताड़ना, क्रूर व्यवहार और लोगों को मनमाने तरीके से हिरासत में रखने जैसे युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया है। करीब छह साल पहले इन्हीं आरोपों का सामना करने के लिए थाची ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था।

Contents
फैसला आते ही सड़कों पर उतरे थाची के समर्थकयुद्ध अपराध साबित, मानवता के खिलाफ आरोपों में बरीकौन हैं हाशिम थाची, जिनका सफर बंदूक से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा?जिस हाथ में बंदूक थी, उसी ने संभाली सत्तामुकदमे के आखिरी दिन भी आरोपों से इनकारअभी बाकी है अपील का रास्ता

कोसोवो की राजधानी प्रिस्टिना में हजारों लोगों ने बड़ी स्क्रीन पर अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखा। जैसे ही सजा सुनाई गई, वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। अदालत में थाची फैसला सुनाए जाने के दौरान शांत खड़े रहे। उनके चेहरे के भावों से उनके मन की स्थिति का अंदाजा लगाना आसान नहीं था।

फैसला आते ही सड़कों पर उतरे थाची के समर्थक

अदालत के फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। हेग स्थित अदालत के पास एक पार्क में जुटे समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की डच दंगा-रोधी पुलिस के साथ मामूली झड़प भी हुई। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया।

कोसोवो के विदेश मंत्री ग्लाउक कोनजुफ्का ने फैसले को देश और कोसोवो के मुक्ति संग्राम के लिए भयानक बताया। वहीं, थाची और उनके सहआरोपियों के समर्थक उन्हें आज भी कोसोवो की आजादी की लड़ाई के नायकों के तौर पर देखते हैं।

युद्ध अपराध साबित, मानवता के खिलाफ आरोपों में बरी

अदालत ने थाची के साथ काद्री वेसेली, रेचेप सेलिमी और जाकुप क्रास्निकी को मानवता के खिलाफ अपराधों के छह आरोपों से बरी कर दिया। जजों ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि ये अपराध आम नागरिकों के खिलाफ किसी व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थे।

हालांकि, युद्ध अपराधों के मामलों में अदालत ने चारों को दोषी पाया। मामले में 385 लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखने, 49 लोगों के साथ क्रूर व्यवहार करने, 303 बंदियों को यातना देने और 96 लोगों की हत्या से जुड़े आरोप शामिल थे।

सजा के तौर पर हाशिम थाची को 25 साल, काद्री वेसेली को 18 साल, रेचेप सेलिमी को 13 साल और जाकुप क्रास्निकी को 25 साल जेल की सजा सुनाई गई।

कौन हैं हाशिम थाची, जिनका सफर बंदूक से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा?

हाशिम थाची उस दौर में कोसोवो की आजादी की लड़ाई के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, जब कोसोवो सर्बिया का एक प्रांत था। आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं का उन्होंने नेतृत्व किया। गुरिल्ला रणनीति में माहिर माने जाने वाले थाची सर्बियाई सुरक्षा बलों से बच निकलने में कामयाब रहते थे। इसी वजह से उन्हें ‘द स्नेक’ उपनाम मिला।

जब कोसोवो में स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू हुई, तब थाची छात्र थे। वह स्विट्जरलैंड में अपने राजनीतिक निर्वासन से लौटे और संघर्ष में शामिल हो गए। उन्होंने तब तक हार नहीं मानी, जब तक कोसोवो की आजादी की लड़ाई निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंच गई।

1999 में फ्रांस में हुई शांति वार्ता में भी थाची को आमंत्रित किया गया था। उस समय पश्चिमी देशों के बीच उन्हें ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता था, जो कोसोवो को आजादी की दिशा में आगे ले जा सकते हैं। कोसोवो की जंग में करीब 13 हजार लोगों की मौत हुई थी।

जिस हाथ में बंदूक थी, उसी ने संभाली सत्ता

युद्ध खत्म होने के बाद थाची ने राजनीति का रास्ता चुना और धीरे-धीरे कोसोवो की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। वह देश के प्रधानमंत्री बने और बाद में राष्ट्रपति पद भी संभाला।

हालांकि, युद्ध के दौर से जुड़े आरोपों ने उनके राजनीतिक सफर को पूरी तरह बदल दिया। सरकारी वकीलों ने अदालत में दिए गए कुछ बयानों के आधार पर दावा किया था कि कोसोवो लिबरेशन आर्मी के दौर में थाची और अन्य आरोपियों ने राजनीतिक विरोधियों तथा उन नागरिकों को निशाना बनाया, जिन्हें वे अपने विरोधी मानते थे।

इन्हीं आरोपों के कारण कभी आजादी की लड़ाई के प्रमुख चेहरे रहे थाची को बाद में अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपने युद्धकालीन रिकॉर्ड का जवाब देना पड़ा।

मुकदमे के आखिरी दिन भी आरोपों से इनकार

करीब तीन साल तक चले मुकदमे की सुनवाई के अंतिम दिन फरवरी में थाची ने जजों के सामने कहा था कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कोसोवो की स्वतंत्रता, जीवन और गरिमा की रक्षा में लगा दिया। उनका कहना था कि युद्ध के दौरान लिए गए उनके फैसले देश की आजादी की लड़ाई के हित में थे।

थाची ने यह भी कहा था कि वह हमेशा पश्चिमी लोकतंत्र, समानता और न्याय के सिद्धांतों से प्रेरित रहे। हालांकि, अदालत ने युद्ध अपराधों से जुड़े आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया।

राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद थाची को अपने पुराने युद्धकालीन रिकॉर्ड से जुड़े आरोपों का सामना करने के लिए हेग की अदालत जाना पड़ा। एमनेस्टी इंटरनेशनल की यूरोप के लिए उप क्षेत्रीय निदेशक एस्थर मेजर ने कहा कि इन दोषसिद्धियों से यह संदेश जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी भी कानून से ऊपर नहीं हैं।

फैसले के दौरान थाची शांत रहे, जबकि उनके तीनों सहआरोपियों ने आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताते हुए इसे साजिश करार दिया।

अभी बाकी है अपील का रास्ता

अदालत के फैसले के बाद थाची और अभियोजन पक्ष, दोनों के पास अपील करने का विकल्प है। अभियोजन पक्ष ने थाची के लिए इससे भी कड़ी सजा की मांग की थी।

फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों के बीच निराशा देखने को मिली। कभी बंदूक के साथ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले, फिर देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनने वाले थाची का सफर अब 25 साल की जेल की सजा तक पहुंच गया है। उनके समर्थक उन्हें आज भी स्वतंत्रता संग्राम के नायक के तौर पर देखते हैं, जबकि अदालत का फैसला उनके युद्धकालीन रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर अपराधों पर आया है।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Hague Court, Hashim Thaci, Hashim Thaci Verdict, KLA, Kosovo Liberation Army, Kosovo News, Kosovo President, Kosovo Specialist Chambers, Kosovo War, Kosovo War Crimes, कोसोवो, कोसोवो आजादी की लड़ाई, कोसोवो युद्ध अपराध, हाशिम थाची, हाशिम थाची 25 साल जेल, हाशिम थाची राष्ट्रपति
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर भारत का बड़ा बयान, कहा-140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरत सबसे पहले
Next Article Asian Champions Trophy 2026: ‘खेलना है तो भारत आना ही पड़ेगा’, हॉकी इंडिया का पाकिस्तान को करारा जवाब!

फीचर

View More

हूतियों ने यमन से लाल सागर तक कैसे बढ़ाया अपना असर? कौन हैं ये विद्रोही, सऊदी अरब से क्यों छिड़ी जंग और ईरान से क्या है कनेक्शन?

सना: यमन के हूती विद्रोही एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में हैं। कभी उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके…

By vineet verma 10 Min Read

ये 10 पक्षी जितने अजीब दिखते हैं, उतने ही दिलचस्प हैं? किसी की चोंच डराती है तो किसी का रंग-रूप करता है हैरान, कुदरत के इन अजूबों को जानिए

प्रयागराज: दुनिया में पक्षियों की अनगिनत प्रजातियां हैं और हर एक की…

6 Min Read

3 लाख का iPhone खरीदें या भविष्य संवारें? एक फोन की कीमत में पढ़ाई, इलाज और कमाई के कितने रास्ते खुलेंगे, आंकड़े जानकर बदल जाएगी सोच

नई दिल्ली: नया महंगा iPhone बाजार में आते ही उसकी कीमत और…

10 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsअन्य

AI की ‘सीक्रेट भाषा’ ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया! एजेंट्स ने खुद गढ़ लिए नए शब्द और मुहावरे, इंसान क्यों नहीं समझ पा रहे इनकी बातचीत?

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ इंसानों की भाषा समझने और उसका जवाब देने तक सीमित नहीं रह गया है।…

7 Min Read
Trending Newsफीचर

हूतियों ने यमन से लाल सागर तक कैसे बढ़ाया अपना असर? कौन हैं ये विद्रोही, सऊदी अरब से क्यों छिड़ी जंग और ईरान से क्या है कनेक्शन?

सना: यमन के हूती विद्रोही एक बार फिर क्षेत्रीय संघर्ष के केंद्र में हैं। कभी उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके…

10 Min Read
Trending Newsसियासी

देशभर से मिल रही हैं पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाइयां, राजनीतिक दलों से लेकर फिल्मी सितारों ने कुछ इस अंदाज में दी शुभकामनाएं…

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर देशभर…

2 Min Read
Trending Newsखेल

Asian Champions Trophy 2026: ‘खेलना है तो भारत आना ही पड़ेगा’, हॉकी इंडिया का पाकिस्तान को करारा जवाब!

एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच मैदान के बाहर नया विवाद खड़ा हो गया है।…

2 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?