- आय से अधिक संपत्ति का आरोप: MIDC के पूर्व जूनियर इंजीनियर भगवानराव दीपके की आर्थिक संपत्ति की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार से शिकायत।
- अवैध चंदा और अन-रजिस्टर्ड पार्टी: CJP पर बिना रजिस्ट्रेशन राजनीतिक गतिविधियाँ चलाने और चंदा जुटाने का आरोप; चुनाव आयोग (ECI) में मामला दर्ज।
- 1 करोड़ का फंड और GST: कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड पर 18% GST लगाने के लिए CBIC से मांग।
सूरत/मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके परिवार की वित्तीय संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सूरत के प्रसिद्ध RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता और पूर्व सरकारी कर्मचारी भगवानराव दीपके की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए तीन अलग-अलग केंद्रीय और राज्य एजेंसियों में शिकायत दर्ज कराई है।
अमित तिवारी का आरोप है कि सीमित सरकारी वेतन के बावजूद दीपके परिवार ने अपने बच्चों की विदेश (अमेरिका) में महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
3 एजेंसियों में शिकायत: ECI, CBIC और महाराष्ट्र सरकार के पास पहुँचा मामला
न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में त्रिस्तरीय कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है:
- महाराष्ट्र सरकार से मांग (आय से अधिक संपत्ति की जांच): अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके ‘महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, जहाँ उनका मासिक वेतन केवल 60,000 से 65,000 रुपये था। तिवारी ने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार जांच करे कि क्या यह ‘आय से अधिक संपत्ति’ (Disproportionate Assets) का मामला है।
- सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC): वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP को दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर CBIC में शिकायत की गई है। मांग की गई है कि गैर-पंजीकृत संगठन को मिली इस राशि पर 18% GST वसूला जाए।
- चुनाव आयोग (ECI) में शिकायत: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 29A के तहत CJP एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। इसके बावजूद यह संगठन एक राजनीतिक पार्टी की तरह काम कर रहा है और भारी चंदा जुटा रहा है, जिस पर चुनाव आयोग को तुरंत एक्शन लेना चाहिए।
“NEET आंदोलन से भटका CJP, प्रधानमंत्री पर की अपमानजनक टिप्पणी”
आंदोलन की दिशा पर सवाल उठाते हुए अमित तिवारी ने कहा कि शुरुआत में CJP का रुख NEET पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली के सुधार तक सीमित था, लेकिन बाद में यह अपने मूल मुद्दे से पूरी तरह भटक गया।
“छात्रों के हित में आवाज उठाने तक कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार पर कथित तौर पर बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा भारत के विदेशी संबंधों को लेकर भी भ्रामक बातें फैलाई गईं। इसी कारण जांच एजेंसियों को हस्तक्षेप कर इस अनधिकृत फंडिंग और बयानों पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।” — अमित तिवारी, RTI एक्टिविस्ट