मेरठ: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या से लेकर अदालत के फैसले तक की कहानी कई चौंकाने वाले मोड़ों से गुजरी। पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मौत की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या करने के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में सीमेंट व रेत के साथ छिपा दिया गया। करीब 590 दिन के घटनाक्रम, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। हालांकि, मौत की सजा पर अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
2016 में हुई थी सौरभ और मुस्कान की लव मैरिज
इस कहानी की शुरुआत करीब एक दशक पहले हुई थी। साल 2016 में मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने प्रेम विवाह किया था। 2019 में दोनों के घर बेटी का जन्म हुआ। बाद में बेटी अपने नाना-नानी के पास रहने लगी।
इसी दौरान मुस्कान की नजदीकियां उसके स्कूल के पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला से बढ़ गईं। सौरभ काम के सिलसिले में लंदन चले गए थे। फरवरी 2025 में वह पत्नी और बेटी का जन्मदिन मनाने मेरठ लौटे। बताया जाता है कि 24 फरवरी को घर पहुंचने के बाद उन्हें मुस्कान और साहिल के संबंधों के बारे में पता चला। इसके बाद घर में विवाद होने लगा।
3 मार्च 2025: खाने में नशीली दवा मिलाकर की गई हत्या
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या की साजिश रची। 3 मार्च 2025 की रात मुस्कान ने सौरभ के खाने में बेहोशी की दवा मिला दी। सौरभ के बेहोश होने के बाद साहिल ने उनका हाथ पकड़ा और मुस्कान ने चाकू से कई वार किए। इससे सौरभ की मौत हो गई।
इसके बाद दोनों शव को बाथरूम में ले गए और उसके पांच टुकड़े कर दिए। शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया। फिर ड्रम में सीमेंट और रेत भरकर उसे बंद कर दिया गया। घर में हत्या के निशान मिटाने की भी कोशिश की गई, ताकि वारदात का पता न चल सके।
हत्या के बाद शिमला-मनाली घूमने निकल गए दोनों
सौरभ की हत्या के बाद किसी को शक न हो, इसके लिए मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली घूमने चले गए। इस दौरान मुस्कान सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करती रही। मामले से जुड़े विवरणों के मुताबिक, उसने करीब 13 दिनों तक इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए। इससे सामान्य दिनचर्या का आभास देने की कोशिश की गई, लेकिन घर में छिपा राज ज्यादा समय तक सामने आने से नहीं बच सका।
18 मार्च 2025: नीले ड्रम से खुला हत्या का राज
18 मार्च 2025 को सौरभ का छोटा भाई राहुल उनके घर पहुंचा। वहां मुस्कान के साथ साहिल भी मौजूद था। राहुल ने जब सौरभ के बारे में पूछा तो मुस्कान संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। घर से दुर्गंध भी आ रही थी। राहुल के शोर मचाने पर पड़ोसी जमा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने घर की तलाशी ली तो नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया। शव को छिपाने के इस तरीके के कारण मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया और इसे नीला ड्रम हत्याकांड कहा जाने लगा।
126 सुनवाई, 22 गवाह और अदालत में पेश किए गए सबूत
जांच पूरी होने के बाद मामले की सुनवाई अदालत में शुरू हुई। इस दौरान कुल 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 अहम गवाह पेश किए। मामले में दवा विक्रेता, ड्रम और सीमेंट बेचने वाले दुकानदारों से जुड़ी जानकारी, कैब चालक के बयान और होटल के रिकॉर्ड जैसे साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा गया।
अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों के आधार पर हत्या की साजिश और सबूत छिपाने की कोशिश से जुड़ी घटनाओं को अदालत में पेश किया। 30 सितंबर 2026 को मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी करार दिया।
14 अक्टूबर को सुनाई गई फांसी की सजा
दोषी करार दिए जाने के बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के दौरान मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया था। सजा सुनकर दोनों के रोने की बात सामने आई।
अदालत में मुस्कान से सजा के बारे में पूछे जाने पर उसने अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की बात कही। साहिल ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया। फैसले के बाद सौरभ की मां भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया है।
सजा सुनाने वाले जज कौन हैं?
मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने वाले मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II का जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ में हुआ था। उन्होंने बीए, एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की है। उन्होंने 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की थी।
करीब 23 साल के न्यायिक अनुभव के दौरान वह गाजीपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और मिर्जापुर समेत कई जिलों में तैनात रहे। नवंबर 2024 में वह मिर्जापुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने और 21 मई 2026 से मेरठ में तैनात हैं।
फांसी की सजा के बाद अब क्या होगा?
मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी दोषियों को तुरंत फांसी नहीं दी जाती। ऐसे मामलों में सजा की पुष्टि हाई कोर्ट से कराना जरूरी होता है। इसके बाद दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प भी हो सकता है। कानून के तहत उपलब्ध अन्य राहतों की मांग भी की जा सकती है। यदि मौत की सजा अंतिम रूप से बरकरार रहती है, तो राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प भी उपलब्ध होता है।
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के मुताबिक, फैसले को हाई कोर्ट में पुष्टि के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अपील और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में दो से तीन साल या उससे अधिक समय भी लग सकता है। इस दौरान उच्च अदालतें सजा में बदलाव कर सकती हैं। इसलिए फांसी की सजा सुनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी।
590 दिन में हत्या से सजा तक पहुंचा मामला
सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी और 18 मार्च को नीले ड्रम से शव मिलने के बाद वारदात का खुलासा हुआ। जांच, गिरफ्तारी और अदालत में सुनवाई के बाद 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल दोषी करार दिए गए। 14 अक्टूबर को दोनों को मौत की सजा सुनाई गई।
करीब 590 दिन के इस घटनाक्रम में प्रेम संबंध, हत्या की साजिश, शव छिपाने की कोशिश और सबूतों के आधार पर चली लंबी सुनवाई अहम पड़ाव रहे। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।