Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: Rahul Gandhi High Tea: एक चाय पार्टी से हिल गई थी वाजपेयी सरकार! जब सोनिया गांधी और जयललिता की मुलाकात ने बदल दिए थे सियासी समीकरण
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > Rahul Gandhi High Tea: एक चाय पार्टी से हिल गई थी वाजपेयी सरकार! जब सोनिया गांधी और जयललिता की मुलाकात ने बदल दिए थे सियासी समीकरण
Trending Newsफीचरसियासी

Rahul Gandhi High Tea: एक चाय पार्टी से हिल गई थी वाजपेयी सरकार! जब सोनिया गांधी और जयललिता की मुलाकात ने बदल दिए थे सियासी समीकरण

news desk
Last updated: October 13, 2026 10:28 am
news desk
Share
SHARE
  • 1999 में सुब्रमण्यम स्वामी के घर हुई चाय पार्टी के बाद तेज हुई थीं सियासी हलचलें
  • जयललिता ने वापस लिया समर्थन और लोकसभा में महज एक वोट से गिर गई अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में चाय की मेज पर होने वाली मुलाकातें कभी-कभी बड़े सियासी संदेश देती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को विपक्षी सांसदों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के साथ हाई-टी बैठक करने जा रहे हैं।

Contents
राहुल गांधी की हाई-टी बैठक के बीच क्यों याद आया 1999 का किस्सा?सोनिया गांधी, जयललिता और सुब्रमण्यम स्वामी की चाय पार्टीजयललिता ने क्यों वापस लिया वाजपेयी सरकार से समर्थन?एक वोट से गिर गई वाजपेयी सरकारछह महीने बाद फिर प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयीक्या राहुल गांधी की हाई-टी से बनेगा कोई नया राजनीतिक समीकरण?

इस बैठक के बीच 1999 का वह चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम भी याद किया जा रहा है, जब एक चाय पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और एआईएडीएमके प्रमुख जे जयललिता की मुलाकात हुई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लोकसभा में विश्वास मत हार गई थी।

हालांकि, वाजपेयी सरकार के गिरने की वजह केवल वह चाय पार्टी नहीं थी। इसके पीछे गठबंधन में लंबे समय से चल रहा टकराव, जयललिता की मांगें और समर्थन वापस लेने का फैसला था। लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी के घर हुई उस मुलाकात ने भारतीय राजनीति में एक दिलचस्प अध्याय जरूर जोड़ दिया।

राहुल गांधी की हाई-टी बैठक के बीच क्यों याद आया 1999 का किस्सा?

मंगलवार को राहुल गांधी अपने आवास पर विपक्षी नेताओं और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के साथ हाई-टी आयोजित कर रहे हैं। यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध और आगे की रणनीति को लेकर हो रही है।

ऐसे में 1999 की चाय पार्टी का जिक्र इसलिए अहम हो जाता है, क्योंकि उस समय भी विपक्षी खेमे में राजनीतिक विकल्पों और सरकार के भविष्य को लेकर हलचल तेज थी। हालांकि, दोनों बैठकों के मुद्दे और राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

राहुल गांधी की बैठक का नतीजा क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन 1999 की घटना बताती है कि गठबंधन की राजनीति में छोटी-सी मुलाकात भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा बन सकती है।

सोनिया गांधी, जयललिता और सुब्रमण्यम स्वामी की चाय पार्टी

इस कहानी की शुरुआत 1998 के लोकसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक समीकरणों से होती है। उस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी। इस सरकार को एआईएडीएमके समेत कई सहयोगी दलों का समर्थन हासिल था।

लेकिन गठबंधन के भीतर मतभेद लगातार बढ़ रहे थे। तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता और बीजेपी नेतृत्व के बीच कई मुद्दों पर टकराव था। जयललिता चाहती थीं कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे, जबकि बीजेपी के लिए सहयोगी दलों की मांगों और गठबंधन के दूसरे घटकों के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन रहा था।

इसी राजनीतिक माहौल में जनता पार्टी के तत्कालीन नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 29 मार्च 1999 को चाय पार्टी आयोजित की। इस बैठक में सोनिया गांधी और जयललिता की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच बातचीत को वाजपेयी सरकार के खिलाफ संभावित राजनीतिक विकल्पों की चर्चा से जोड़कर देखा गया।

उस समय कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर थी और वाजपेयी सरकार को हटाने के लिए विपक्षी दलों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें चल रही थीं। जयललिता के पास सरकार के बहुमत को प्रभावित करने की क्षमता थी, क्योंकि उनकी पार्टी के सांसद एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण थे।

जयललिता ने क्यों वापस लिया वाजपेयी सरकार से समर्थन?

चाय पार्टी के बाद भी बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच मतभेद खत्म नहीं हुए। जयललिता की मांगों में तमिलनाडु की तत्कालीन डीएमके सरकार को बर्खास्त करने का मुद्दा भी शामिल था। इसके अलावा केंद्र सरकार के साथ उनके कई राजनीतिक और प्रशासनिक मतभेद थे।

वाजपेयी सरकार उनकी सभी मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी। इससे गठबंधन में तनाव बढ़ता गया और आखिरकार अप्रैल 1999 में जयललिता ने एनडीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

इस फैसले ने सरकार के बहुमत पर संकट खड़ा कर दिया। राष्ट्रपति केआर नारायणन ने वाजपेयी सरकार को लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए कहा। इसके बाद पूरा देश संसद में होने वाले मतदान के नतीजे का इंतजार करने लगा।

एक वोट से गिर गई वाजपेयी सरकार

17 अप्रैल 1999 को लोकसभा में विश्वास मत पर मतदान हुआ। यह भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे नाटकीय राजनीतिक मुकाबलों में शामिल हो गया।

वाजपेयी सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े, जबकि विरोध में 270 सांसदों ने मतदान किया। इस तरह सरकार महज एक वोट से विश्वास मत हार गई और अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

इस घटनाक्रम में ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग का वोट भी बेहद चर्चित रहा। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया था और सांसद के तौर पर विश्वास मत में हिस्सा लिया। उन्होंने सरकार के खिलाफ मतदान किया।

एक वोट के अंतर से मिली हार ने दिखा दिया कि गठबंधन सरकार में प्रत्येक सांसद का समर्थन कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके बाद देश मध्यावधि लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ गया।

छह महीने बाद फिर प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी

वाजपेयी सरकार गिरने के बाद 1999 में लोकसभा चुनाव हुए। इससे पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध भी हो चुका था। राष्ट्रीय सुरक्षा, नेतृत्व और स्थिर सरकार जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे।

इस बार बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने बहुमत हासिल किया। 13 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी यह सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।

इस तरह 1999 की राजनीति में पहले समर्थन वापसी, फिर एक वोट से सरकार गिरने और उसके बाद दोबारा सत्ता में वापसी का पूरा घटनाक्रम देखने को मिला।

क्या राहुल गांधी की हाई-टी से बनेगा कोई नया राजनीतिक समीकरण?

राहुल गांधी की मौजूदा हाई-टी बैठक को लेकर भी राजनीतिक हलकों में उत्सुकता है। इसमें विपक्षी सांसदों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की रणनीति बताया जा रहा है।

हालांकि, 1999 की चाय पार्टी और आज की बैठक के बीच सीधा राजनीतिक समानांतर खींचना जल्दबाजी होगी। उस समय सरकार के बहुमत पर संकट था, जबकि मौजूदा बैठक का संदर्भ अलग है।

फिर भी इतिहास का यह किस्सा याद दिलाता है कि राजनीति में बातचीत, गठबंधन और समर्थन के समीकरण बेहद अहम होते हैं। सुब्रमण्यम स्वामी के घर हुई चाय पार्टी के बाद की घटनाओं ने भारतीय राजनीति में एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसकी चर्चा आज भी होती है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी की हाई-टी बैठक से विपक्ष की आगे की रणनीति को क्या दिशा मिलती है।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: 1999 विश्वास मत, Giridhar Gamang, NDA Government 1999, Rahul Gandhi, Rahul Gandhi High Tea, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार, जयललिता समर्थन वापसी, भारतीय राजनीति, सुब्रमण्यम स्वामी, सोनिया गांधी जयललिता
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article Indo-Nepal Cricket Series 2026: आज से लखनऊ में इंडो-नेपाल क्रिकेट सीरीज का आगाज, फ्लडलाइट में भिड़ेंगी टीमें
Next Article 32,000 मौतों के बाद खुला शांति का रास्ता? ट्रंप का दावा— पुतिन समझौते के लिए बेताब!

फीचर

View More

अन्ना से पहलवानों तक… क्यों हर बड़े आंदोलन की पहली पसंद रहा जंतर-मंतर? अब बदले नियमों से उठे लोकतंत्र पर सवाल

नई दिल्ली: देश की राजधानी का जंतर-मंतर सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि दशकों से जनता की आवाज, विरोध और…

By vineet verma 9 Min Read

स्मार्टफोन की लत बनी मानसिक बीमारी: 13 साल के बच्चे का 12 घंटे गेम खेलना डराने वाला सच, जानिए कैसे करें बचाव

आज के डिजिटल दौर में बच्चों से लेकर बड़ों तक के हाथ…

4 Min Read

नैनीताल-मसूरी की भीड़ से हैं परेशान? उत्तराखंड की इन 3 खूबसूरत जगहों पर बिताएं सुकून के पल, यादगार बनेगा सफर

नई दिल्ली: उत्तराखंड की वादियां, पहाड़ों से आती ठंडी हवाएं और प्रकृति…

4 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsसियासी

जंतर-मंतर की ओर बढ़े CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में, प्रदर्शन स्थल बदलने पर विवाद

नई दिल्ली।दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद विरोध तेज हो गया है। मंगलवार,…

3 Min Read
Trending Newsधर्म

शारदीय नवरात्रि 2026: पूजा के दौरान अचानक बुझ जाए अखंड दीपक? जानें क्या है धार्मिक नियम और सही उपाय

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर माँ दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में माता को…

4 Min Read
Trending Newsवर्ल्ड

32,000 मौतों के बाद खुला शांति का रास्ता? ट्रंप का दावा— पुतिन समझौते के लिए बेताब!

रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 से जारी युद्ध को खत्म कराने की कोशिशें अब तक सफल नहीं…

4 Min Read
Trending News

Prithvi Shaw-Akriti Agarwal: टूट गई थी सगाई, अब फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल! मंगेतर ने बताई सुलह की वजह

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल की निजी जिंदगी एक बार फिर चर्चा में है। कुछ समय…

4 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?