अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। इस पद के लिए हजारों लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन अंतिम चरण में पहुंचे नामों में से जितेंद्र मिश्र को चुना गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनके नाम पर ही मुहर क्यों लगी?
जितेंद्र मिश्र के चयन के पीछे उनकी लंबी सैन्य सेवा और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से सही निर्णय लेने का अनुभव अहम माना जा रहा है। करीब 39 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े सैन्य अभियान में उनकी भूमिका ने भी उनकी नेतृत्व क्षमता को सामने रखा।
संकट के समय फैसले लेने का अनुभव बना बड़ी वजह
राम मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, भीड़ का प्रबंधन, व्यवस्था और विभिन्न स्तरों पर समन्वय जैसी जिम्मेदारियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।
जितेंद्र मिश्र के सैन्य अनुभव को इसी लिहाज से उनकी नियुक्ति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह दिल्ली स्थित पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ थे। इस कमान के तहत सियाचिन से दिल्ली तक महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी आती है।
ऑपरेशन के दौरान दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश में दागी गई एक मिसाइल को भारतीय वायुसेना ने सिरसा के आसमान में मार गिराया था। ऐसे संवेदनशील हालात में कमान संभालने का अनुभव जितेंद्र मिश्र के चयन में अहम माना गया।
फाइटर स्क्वाड्रन से लेकर पश्चिमी वायु कमान तक लंबा अनुभव
जितेंद्र मिश्र का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा है। उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया। इसके अलावा वह चीफ टेस्ट पायलट और दो अग्रिम पंक्ति के एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रहे।
वायु मुख्यालय में भी उन्होंने ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के निदेशक और सहायक वायु सेनाध्यक्ष (प्रोजेक्ट्स) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह उप एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख (ऑपरेशंस) के पद पर भी कार्यरत थे।
1986 में शुरू हुआ था फाइटर पायलट का सफर
एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया।
उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से प्रशिक्षण लिया है। सैन्य संचालन और नेतृत्व से जुड़ी उनकी यह व्यापक पृष्ठभूमि अब राम मंदिर के प्रशासन में काम आएगी।
1 जनवरी 2025 को संभाली थी पश्चिमी वायु कमान की कमान
जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का पद संभाला था। इस पद पर उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा का स्थान लिया था।
अब वायुसेना में लंबे अनुभव के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े बदलावों के बीच उनकी नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रस्ट को ऐसे अधिकारी की जरूरत थी, जिसे बड़े स्तर पर व्यवस्था संभालने, सुरक्षा पर नजर रखने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णायक फैसले लेने का अनुभव हो।