चंडीगढ़। पंजाब में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता राघव चड्ढा का नाम भी ड्राफ्ट मतदाता सूची से गायब है। खास बात यह है कि उनकी एंट्री को ‘Permanently Shifted’ यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित श्रेणी में रखा गया है।
राघव चड्ढा ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और पंजाब सरकार की मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने में कोई भूमिका नहीं है।
20.66 लाख नाम हटे, करीब 9.63 फीसदी मतदाता प्रभावित
पंजाब में SIR के तहत 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। यह 9 जून 2026 को दर्ज कुल 2.14 करोड़ मतदाताओं का लगभग 9.63 फीसदी है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए नामों में करीब 9.44 लाख मतदाता ‘Permanently Shifted’, 5.74 लाख मृत, 4.12 लाख अनट्रेस्ड और करीब 1.19 लाख डुप्लीकेट बताए गए हैं।
यानी राघव चड्ढा का नाम जिस श्रेणी में डाला गया है, वह पंजाब की SIR प्रक्रिया में सबसे बड़ी deletion category है।
चड्ढा बोले- मोहाली में रजिस्टर्ड है मेरा वोटर ID
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर ID मोहाली, पंजाब में रजिस्टर्ड है। इसके बावजूद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उन्हें ‘shifted’ दिखाया गया।
चड्ढा का कहना है कि यह महज क्लेरिकल गलती नहीं लगती, बल्कि उनके खिलाफ राजनीतिक बदले का मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट अंतिम सूची नहीं है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान नाम को ठीक कराया जा सकता है।
SIR के पैराग्राफ 4(d) को लेकर भी सवाल
राघव चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का भी हवाला दिया है। इस प्रावधान में न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल तथा जनसेवा से जुड़ी कुछ प्रमुख हस्तियों को लेकर विशेष प्रावधान है।
चड्ढा का तर्क है कि अगर उनका नाम पहले से चुनावी डेटाबेस में चिह्नित था, तो उन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था, ताकि दावे-आपत्तियों के दौरान जरूरी दस्तावेज हासिल किए जा सकें।
AAP ने पलटवार किया- SIR में पंजाब सरकार की भूमिका नहीं
राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि SIR चुनाव आयोग द्वारा संचालित प्रक्रिया है और पंजाब सरकार यह तय नहीं करती कि किस मतदाता का नाम सूची में रखा जाए या हटाया जाए।
AAP ने चड्ढा के दिल्ली में रहने और कथित तौर पर वहां वोटर रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि अगर चड्ढा पंजाब से बाहर रह रहे हैं तो वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना उनकी जिम्मेदारी है।
अब 12 सितंबर तक है मौका
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि मामला हमेशा के लिए खत्म हो गया। पंजाब में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 12 सितंबर 2026 है। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं।
इसलिए राघव चड्ढा के मामले में भी असली तस्वीर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद साफ होगी।
AAP छोड़ BJP में जाने के बाद बढ़ी राजनीतिक तल्खी
राघव चड्ढा 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। अब उनके नाम का पंजाब की SIR ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर होना राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चड्ढा और उनकी पूर्व पार्टी AAP के बीच रिश्ते बेहद तल्ख हो चुके हैं।
फिलहाल, एक तरफ चड्ढा इसे राजनीतिक बदले से जोड़ रहे हैं और दूसरी तरफ AAP चुनाव आयोग की स्वतंत्र भूमिका का हवाला देकर आरोपों से पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि राघव चड्ढा का नाम ‘Permanently Shifted’ श्रेणी में आखिर किन आधारों पर दर्ज हुआ और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में उनका नाम वापस आता है या नहीं।