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बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में राजनाथ सिंह का बड़ा संदेश, बोले- ज्ञान के साथ चरित्र और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी

vineet verma
Last updated: August 29, 2026 9:22 pm
vineet verma
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लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 11वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन हुआ। समारोह में भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान शैक्षणिक सत्र 2023, 2024, 2025 और 2026 के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में रक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और ज्ञान के साथ चरित्र, संस्कार, संवेदनशीलता तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

Contents
राजनाथ सिंह बोले- बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए सोच भी बड़ी होनी चाहिएशिक्षा ऐसी हो जो मस्तिष्क, हृदय और हाथों का विकास करेनौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवाराष्ट्र निर्माण में योगदान का उपमुख्यमंत्री ने किया आह्वानबीबीएयू को नैक में ए प्लस प्लस, विश्वविद्यालय श्रेणी में 37वां स्थान22 विद्यार्थियों को मंच से स्वर्ण पदक और उपाधि देकर किया सम्मानितप्रो. देवेश कुमार को डीएससी की उपाधिविद्यार्थियों ने लिया राष्ट्र और समाजहित में काम करने का संकल्प

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सदस्य मिथिलेश कुमार, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल और परीक्षा नियंत्रक प्रो. विक्रम सिंह यादव मंच पर मौजूद रहे। समारोह की शुरुआत बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण से हुई। इसके बाद शैक्षणिक शोभायात्रा, दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत का आयोजन किया गया। कुलपति ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और गतिविधियों की जानकारी दी।

राजनाथ सिंह बोले- बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए सोच भी बड़ी होनी चाहिए

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए मन को बड़ा रखना जरूरी है। व्यापक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्ति को वास्तविक सुख और संतुष्टि की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा और चिंतन सदियों से समृद्ध रहा है। संत-महात्माओं ने जिन जीवन मूल्यों और विचारों की बात बहुत पहले कही, आज दुनिया उन्हें अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज जो बोलता है, दुनिया उसे ध्यान से सुनती है।

शिक्षा ऐसी हो जो मस्तिष्क, हृदय और हाथों का विकास करे

राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय का नाम महान विचारक और समाज सुधारक डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर से जुड़ा है, इसलिए यहां से निकलने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं। उन्होंने शिक्षा को मस्तिष्क, हृदय और हाथों के समन्वित विकास से जोड़ते हुए कहा कि मस्तिष्क से तार्किक और विवेकपूर्ण क्षमता, हृदय से मानवीय संवेदना तथा हाथों के माध्यम से ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में बदलने की क्षमता विकसित होनी चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कार के साथ संवेदनशीलता जरूरी है। विद्यार्थियों में समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए। उन्होंने उपलब्धियों की तुलना अंकों से करते हुए कहा कि चरित्र और संस्कार वह आधार हैं, जिनके साथ उपलब्धियों का मूल्य कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए केवल ज्ञान हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि चरित्र, संस्कार और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता भी जरूरी है।

नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी कामना है कि बीबीएयू से ऐसे युवा निकलें, जो भारत के भविष्य की तस्वीर बदलने में सक्षम हों। युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार देने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को उनके शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो के मंत्र से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल यात्रा की शुरुआत का प्रवेश बिंदु है। यह तय नहीं करती कि व्यक्ति अपने जीवन में कहां तक पहुंचेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों से सबको साथ लेकर चलने की क्षमता विकसित करने और चुनौतियों को अवसरों में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप तंत्र है। युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता के बल पर देश को और आगे ले जाने की अपार संभावनाएं हैं।

राष्ट्र निर्माण में योगदान का उपमुख्यमंत्री ने किया आह्वान

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आगे बढ़ते समय युवाओं को अंकों की दौड़ से स्वयं को अलग करना होगा। विश्वविद्यालय से हासिल ज्ञान का उद्देश्य केवल उपाधि प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा काम करना होना चाहिए जिससे समाज और देश को लाभ मिले।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के लिए करने का आह्वान किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर और अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों एवं योगदान का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों ने समाज और राष्ट्र के उत्थान का जो सपना देखा, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है।

बीबीएयू को नैक में ए प्लस प्लस, विश्वविद्यालय श्रेणी में 37वां स्थान

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बीबीएयू ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद में ए प्लस प्लस ग्रेड हासिल किया है। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचे की विश्वविद्यालय श्रेणी में विश्वविद्यालय को 37वां स्थान प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पंचकोशीय आधारित शिक्षा प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की प्रतिभा और रचनात्मक क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए 20 रुचि क्लब स्थापित किए गए हैं। नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए धारा-8 कंपनी ‘नवकल्पना’ की स्थापना की गई है।

कुलपति ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया गया है। डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया सहित विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों के अनुरूप भी विश्वविद्यालय में कार्य किए जा रहे हैं। दिसंबर तक नए अकादमिक भवन के तैयार होने की संभावना है। परिसर में सड़कों के चौड़ीकरण और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच गांवों को गोद लिया गया है। विश्वविद्यालय के वृक्षारोपण अभियान के तहत 2,055 पौधे लगाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया गया है। परिसर में मियावाकी वन विकसित किया गया है। वहीं करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से अमेठी परिसर में सुविधाओं के विकास और विस्तार का कार्य किया जा रहा है।

22 विद्यार्थियों को मंच से स्वर्ण पदक और उपाधि देकर किया सम्मानित

दीक्षांत समारोह में चारों शैक्षणिक वर्षों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 22 विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि, अन्य अतिथियों और कुलपति ने मंच से सम्मानित किया।

शैक्षणिक वर्ष 2023 में बृजेश गुप्ता, प्रियांशु और सोनम वर्मा को मैकेनिकल इंजीनियरिंग, जागृति सिंह को एम.एससी. लाइफ साइंसेज और रचार्ला ओजस्विथा राव को एम.एससी. एग्रीकल्चर के लिए स्वर्ण पदक और उपाधि प्रदान की गई।

शैक्षणिक वर्ष 2024 में हर्षिता पाठक को कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, अवंतिका कुमारी को बीएससी ऑनर्स जियोलॉजी, प्राची गुप्ता को एम.एससी. मैथमेटिक्स और के.एम. प्रतिभा वर्मा को एम.एससी. लाइफ साइंसेज के लिए सम्मानित किया गया।

शैक्षणिक वर्ष 2025 में स्तुति कुमारी को बीएससी फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, अभिषेक कुमार को बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग, नंदिनी शर्मा को एम.एससी. मैथमेटिक्स और आस्था प्रियदर्शिनी को इंटीग्रेटेड बीएससी-एमएससी बेसिक साइंसेज के लिए स्वर्ण पदक और उपाधि प्रदान की गई।

शैक्षणिक वर्ष 2026 में शुभम यादव को बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग, आनंद कुमार को बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, गोनुगुंटला गोपी कृष्णा को एम.एससी. हॉर्टिकल्चर, वेजिटेबल साइंस और जिज्ञासा को एम.एससी. फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिए स्वर्ण पदक और उपाधि से सम्मानित किया गया।

प्रो. देवेश कुमार को डीएससी की उपाधि

समारोह में विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. देवेश कुमार को डीएससी की उपाधि प्रदान की गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के शुरुआती प्रशासकों में शामिल रहे श्री आर.डी. सोनकर के नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कार से विभिन्न वर्षों के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

इनमें शैक्षणिक वर्ष 2023 के ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, वर्ष 2024 की शिवांगी, वर्ष 2025 की सोनी निर्मल और वर्ष 2026 की प्रभा चंद्र शामिल हैं।

विद्यार्थियों ने लिया राष्ट्र और समाजहित में काम करने का संकल्प

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, गतिविधियों और महत्वपूर्ण कार्यों पर आधारित 11वें दीक्षांत समारोह की स्मारिका का विमोचन किया गया। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान और कौशल का सदुपयोग करने, राष्ट्र और समाजहित में कार्य करने तथा देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

कुलपति ने विद्यार्थियों से कहा कि उपाधि मिलना शैक्षणिक यात्रा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को उन लोगों को कभी नहीं भूलने की सीख दी, जिन्होंने उनकी सफलता में योगदान दिया। उन्होंने युवाओं से यह विचार करने को कहा कि अपने ज्ञान और कौशल के माध्यम से वे समाज को क्या नया दे सकते हैं और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भूमिका क्या हो सकती है।

दीक्षांत समारोह के दूसरे सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उनके संबंधित विभागों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से उपाधियां प्रदान की गईं। चारों वर्षों के स्वर्ण पदक विजेताओं और पीएचडी शोधार्थियों समेत अन्य विद्यार्थियों को भी उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल के सदस्य, शैक्षणिक परिषद के सदस्य, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, अभिभावक, उपाधि प्राप्तकर्ता, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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