कभी हैदराबाद की तंग गलियों में एक-एक मैच के किराए के लिए संघर्ष करने वाले मोहम्मद सिराज ने आज सफलता का ऐसा परचम लहराया है, जो देश के करोड़ों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज ‘मियां भाई’ यानी मोहम्मद सिराज अब एक नए और बेहद गौरवशाली रूप में नजर आ रहे हैं।
तेलंगाना पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) का पदभार संभालने के बाद सिराज ने खाकी वर्दी में अपनी पहली तस्वीर शेयर की। उनका लिखा केवल एक वाक्य—“DSP मोहम्मद सिराज रिपोर्टिंग फॉर ड्यूटी”—इंटरनेट पर वायरल हो गया है और फैंस का दिल जीत रहा है।
टी20 वर्ल्ड कप जीत का इनाम: ऑटो ड्राइवर के बेटे से खाकी तक का सफर
टी20 विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सिराज को तेलंगाना सरकार ने उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित करते हुए DSP पद और प्लॉट देने की घोषणा की थी।
- संघर्ष से सफलता की कहानी: एक समय था जब सिराज के पिता ऑटो चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते थे। आर्थिक तंगहाली के बावजूद सिराज के हौसले पस्त नहीं हुए।
- वर्दी में झलका गर्व: तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात के दौरान सिराज ने उन्हें भारतीय टीम की जर्सी भी भेंट की। वर्दी में सिराज का यह रूप न केवल एक अधिकारी का है, बल्कि उस जज्बे का प्रतीक है जो बताता है कि कड़ी मेहनत से किस्मत की लकीरें भी बदली जा सकती हैं।
मैदान पर खली ‘सिराज मैजिक’ की कमी
हाल ही में वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत सिराज को आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरों से आराम दिया गया था। लेकिन मैदान पर उनकी अनुपस्थिति ने साफ कर दिया कि भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में उनका क्या वजूद है:
- बेअसर रहा पावरप्ले: नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की सिराज की काबिलियत के बिना भारतीय टीम पावरप्ले में शुरुआती झटके देने में नाकाम रही।
- डेथ ओवरों में यॉर्कर का अभाव: इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी ओवरों में भारतीय गेंदबाज रन रोकने के लिए संघर्ष करते दिखे, जहां फैंस को सिराज की सटीक यॉर्कर और आक्रामकता याद आई।
जल्द ही मैदान पर ‘साहब’ की होगी वापसी
आराम के बाद सिराज अब और भी ज्यादा ऊर्जा के साथ मैदान पर वापसी करने के लिए तैयार हैं। फैंस अब उन्हें सिर्फ एक तेज गेंदबाज के रूप में ही नहीं, बल्कि देश के एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में भी देखेंगे।
हैदराबाद के मैदानों से शुरू हुआ सिराज का सफर अब खाकी वर्दी तक पहुँच चुका है। ‘मियां भाई’ की यह उपलब्धि साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है।