झांसी: एक तरफ पत्नी की मौत का सदमा और दूसरी तरफ उसके शव को घर ले जाने के लिए भी पैसे नहीं। मेडिकल कॉलेज के बाहर शुक्रवार को एक मजदूर परिवार की ऐसी बेबसी सामने आई, जिसने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया। स्ट्रेचर पर 35 वर्षीय रामवती का शव पड़ा था, जबकि उनके पति राहुल आदिवासी जमीन पर बैठकर मदद का इंतजार कर रहे थे। पास ही आठ साल की बेटी नन्दिनी रोते हुए अपनी मां को निहार रही थी। बारिश के बीच वह बार-बार मां को पुकारकर कह रही थी, “मां, बस एक बार उठ जाओ।”
15 दिन से बीमार थीं रामवती, अचानक बिगड़ी तबीयत
निवाड़ी जिले के ओरछा क्षेत्र के नकटा गांव निवासी राहुल आदिवासी मजदूरी करते हैं। उनकी पत्नी रामवती भी मजदूरी करके परिवार चलाने में पति का सहयोग करती थीं। परिवार में दो बेटे विजय (20), राकेश (15) और बेटी नन्दिनी (8) हैं।
परिजनों के मुताबिक, रामवती करीब 15 दिनों से बीमार चल रही थीं। शुक्रवार सुबह अचानक उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद राहुल अपनी बेटी के साथ उन्हें ओरछा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर पहुंचे।
ओरछा से झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने रामवती को झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। इस दौरान एक चिकित्सक ने राहुल की आर्थिक मदद की। इसी सहायता से ऑटो की व्यवस्था हो सकी और वह पत्नी को लेकर झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने रामवती को मृत घोषित कर दिया। पत्नी की मौत की खबर सुनते ही राहुल और उनकी बेटी सदमे में आ गए। कुछ ही देर में परिवार के सामने एक और बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई।
शव ले जाने के लिए नहीं थे पैसे, स्ट्रेचर लेकर पार्किंग में बैठा परिवार
रामवती की मौत के बाद राहुल के पास शव को गांव तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। परिवार को किराए की एम्बुलेंस से शव ले जाने की बात कही गई, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह इसका इंतजाम नहीं कर सके।
मजबूरी में राहुल अपनी पत्नी का शव स्ट्रेचर पर लेकर इमरजेंसी के बाहर पार्किंग में बैठ गए। बारिश के बीच एक बच्ची अपनी मां के शव के पास बैठी रही और परिवार मदद की उम्मीद में करीब दो घंटे तक वहीं रहा।
दो घंटे बाद सिपाही की नजर पड़ी, फिर मिली एम्बुलेंस
करीब दो घंटे बाद मेडिकल चौकी पर तैनात सिपाही अजय की नजर इस परिवार पर पड़ी। उन्होंने हालात समझे और तत्काल मदद के लिए राजाराम स्वयंसेवी संस्था से संपर्क किया।
संस्था की एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई, जिसके जरिए रामवती के शव को झांसी मेडिकल कॉलेज से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित उनके घर तक पहुंचाया गया।