गाजा और लेबनान मोर्चे पर जारी युद्ध के बीच इजरायल अब अपने ही घर में अंदरूनी बगावत और भारी राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। सेना भर्ती (Draft Conscription) में छूट को लेकर भड़की हिंसा ने देश को गृहयुद्ध जैसे मुहाने पर ला खड़ा किया है। सोमवार रात करीब 25,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (हरदी समुदाय) प्रदर्शनकारियों ने ‘बेइट लिड’ मिलिट्री जेल पर धावा बोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने सेना के बेस की बाउंड्री तोड़ दी और सैन्य पुलिस से भिड़ गई।
यह हिंसक झड़प तब शुरू हुई जब सेना में भर्ती से छूट पाने पहुंचे एक येशिवा (धार्मिक) छात्र को मिलिट्री पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने पूरे इजरायल में आग में घी डालने का काम किया है।
कोर्ट के फैसले से भड़का गुस्सा: क्या है पूरा विवाद?
इजरायल में सभी यहूदी पुरुषों के लिए सेना (IDF) में सेवाएं देना अनिवार्य है, लेकिन दशकों से हरदी (Haredi) समुदाय के येशिवा छात्रों को तोराह (पवित्र ग्रंथ) की पढ़ाई के नाम पर इसमें छूट मिलती आ रही थी।
- हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: साल 2024 में इजरायल के ‘हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस’ ने इस छूट को गैर-कानूनी और भेदभावपूर्ण करार देते हुए हरदी समुदाय के युवाओं को भी सेना में शामिल करने का आदेश दिया था।
- नेसेट में विवादास्पद कानून: सत्ता बचाने के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार ने संसद (नेसेट) में 63-52 के बहुमत से एक नया ‘बेसिक लॉ’ पारित किया, जिसमें तोराह के अध्ययन को देश का मूल मूल्य मानते हुए हरदी युवाओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।
- सुप्रीम कोर्ट का स्टे ऑर्डर: सुप्रीम कोर्ट ने इस नए कानून के लागू होने पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट के इस कदम के तुरंत बाद सैन्य पुलिस ने ड्राफ्ट से बचने वाले धार्मिक छात्र को गिरफ्तार कर लिया, जिसके विरोध में 25 हजार लोग सड़कों पर उतर आए।
नेतन्याहू की राजनीतिक सांसें अटकीं: क्यों अंदर से टूट रहा है इजरायल?
यह विवाद सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि इजरायल के अस्तित्व और राजनीति से जुड़ा हुआ है:
- गठबंधन सरकार पर संकट: नेतन्याहू की सरकार हरदी समुदाय से जुड़ी राजनीतिक पार्टियों (जैसे यूनाइटेड तोराह जुडिज्म) के समर्थन पर टिकी है। अगर नेतन्याहू इन्हें छूट नहीं दिलवा पाते, तो सरकार गिर सकती है।
- आम नागरिकों और सेना में असंतोष: एक तरफ जहां देश का आम नागरिक और सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर सभी के लिए समान सैन्य सेवा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हरदी समुदाय पूरी तरह छूट की मांग पर अड़ा है।
- 27 अक्टूबर के चुनाव: संसद भंग होने के कगार पर है और 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से ठीक पहले इस मुद्दे ने इजरायली समाज को दो हिस्सों में फाड़ दिया है।
- 25,000 प्रदर्शनकारियों का हमला: इजरायल के ‘बेइट लिड’ मिलिट्री बेस की बाउंड्री तोड़ी, पुलिस के साथ हिंसक झड़प।
- विवाद की वजह: सेना में भर्ती से बचने वाले ऑर्थोडॉक्स यहूदी छात्र की गिरफ्तारी।
- न्यायपालिका बनाम सरकार: संसद के नए कानून पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, 28 जुलाई को होगी अगली अहम सुनवाई।
एक तरफ जहां इजरायल बाहरी दुश्मनों से सीमा पर लड़ रहा है, वहीं अंदरूनी मोर्चे पर ‘धर्म बनाम राष्ट्र सेवा’ की इस जंग ने देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे की नींव हिला दी है।