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लाइफस्टाइल

सांप ने काट लिया तो घबराएं नहीं! पहले 60 मिनट में उठाया गया यह कदम बचा सकता है जान, डॉक्टर ने बताई सही प्रक्रिया

vineet verma
Last updated: June 23, 2026 7:52 am
vineet verma
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सर्पदंश
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नई दिल्ली: मानसून के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भरने के कारण उनका बाहर निकलना बढ़ जाता है। ऐसे समय में खेतों, ग्रामीण इलाकों और झाड़ियों के आसपास काम करने वाले लोगों के लिए सांप के डंसने का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान लिया गया सही फैसला मरीज की जान बचा सकता है।

Contents
भारत में हर साल हजारों लोगों की जाती है जानसांप के काटते ही क्या करें?ये गलतियां पड़ सकती हैं भारीघाव को धोने से भी बचने की सलाहजहर का एकमात्र वैज्ञानिक इलाज क्या है?भारत के ‘बिग फोर’ सांपों से सबसे ज्यादा खतराबचाव के लिए क्या करें?सरकार ने उठाया अहम कदमयाद रखें सबसे जरूरी बात

चिकित्सकों के अनुसार आज भी बड़ी संख्या में लोग अंधविश्वास, घरेलू नुस्खों और झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवा देते हैं, जबकि वैज्ञानिक इलाज में देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

भारत में हर साल हजारों लोगों की जाती है जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में हर वर्ष लाखों लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। इनमें बड़ी संख्या में मामलों में शरीर में जहर फैल जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर साल लगभग 58 हजार लोगों की मौत सांप के डंसने से होती है। सबसे अधिक प्रभावित ग्रामीण आबादी, किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर होते हैं।

सांप के काटते ही क्या करें?

डॉक्टरों का कहना है कि सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना है।

मरीज को शांत रखने की कोशिश करें, क्योंकि घबराहट से दिल की धड़कन तेज हो जाती है और जहर शरीर में तेजी से फैल सकता है। जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे कम से कम हिलने-डुलने दें और दिल के स्तर से थोड़ा नीचे रखें।

यदि हाथ या पैर में अंगूठी, कड़ा, चूड़ी, घड़ी या तंग कपड़े हों तो उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए, क्योंकि बाद में सूजन बढ़ सकती है।

ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

विशेषज्ञों ने कई पारंपरिक तरीकों को खतरनाक बताया है। सांप के काटने पर घाव पर चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसने की कोशिश करना या कसकर रस्सी बांधना नुकसानदायक हो सकता है।

इसी तरह घाव पर बर्फ लगाना, शराब पिलाना या घरेलू जड़ी-बूटियों के भरोसे रहना भी उचित नहीं माना जाता। ये उपाय न केवल स्थिति को बिगाड़ सकते हैं बल्कि सही इलाज में देरी का कारण भी बनते हैं।

घाव को धोने से भी बचने की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार सांप के काटे हुए स्थान को पानी से धोने से भी बचना चाहिए। कई मामलों में त्वचा पर मौजूद अवशेषों से सांप की पहचान और चिकित्सा संबंधी जांच में मदद मिल सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को बिना समय गंवाए चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया जाए।

जहर का एकमात्र वैज्ञानिक इलाज क्या है?

चिकित्सकों के मुताबिक सांप के जहर को निष्क्रिय करने का एकमात्र प्रमाणित उपचार एंटी-स्नेक वेनम है। समय पर यह दवा मिलने से लकवा, आंतरिक रक्तस्राव, किडनी फेल होने, ऊतकों को नुकसान पहुंचने और मौत जैसे गंभीर खतरों को कम किया जा सकता है।

इसीलिए विशेषज्ञ बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि अस्पताल पहुंचना ही सबसे बड़ा उपचार है।

भारत के ‘बिग फोर’ सांपों से सबसे ज्यादा खतरा

देश में अधिकांश गंभीर सर्पदंश मामलों के पीछे चार प्रमुख जहरीले सांपों को जिम्मेदार माना जाता है। इनमें इंडियन कोबरा, कॉमन करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि करैत विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसके काटने पर कई बार दर्द या स्पष्ट निशान दिखाई नहीं देते। कुछ समय बाद मरीज में पेट दर्द, आंखों की पलकों का भारी होना और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

बचाव के लिए क्या करें?

मानसून के दौरान रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करना चाहिए। खेतों, झाड़ियों और लकड़ी या कबाड़ के ढेर के आसपास काम करते समय मजबूत जूते पहनना जरूरी है।

घर और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने से भी सांपों के छिपने की संभावना कम की जा सकती है।

सरकार ने उठाया अहम कदम

सर्पदंश की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे “नोटिफायबल डिजीज” की श्रेणी में शामिल किया है। इसका उद्देश्य मामलों की बेहतर निगरानी, समय पर उपचार और जागरूकता बढ़ाना है, ताकि सर्पदंश से होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को कम किया जा सके।

याद रखें सबसे जरूरी बात

सांप के डंसने के बाद झाड़-फूंक, तांत्रिक या घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाय सीधे अस्पताल जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर चिकित्सा सहायता मिलने पर अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

 

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