नई दिल्ली: अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के आपके हाथ, पैर, टखने या चेहरे पर सूजन महसूस होती है, थोड़ी देर बैठने पर पैर फूल जाते हैं या शरीर भारी-भारी लगता है, तो यह वॉटर रिटेंशन की समस्या का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने पर यह स्थिति पैदा होती है, जिससे सूजन के साथ दर्द और असहजता भी बढ़ सकती है।
क्या है वॉटर रिटेंशन और क्यों होती है यह समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, वॉटर रिटेंशन वह स्थिति है, जब शरीर के टिशूज़ में आवश्यकता से अधिक पानी जमा होने लगता है। इससे हाथ, पैर, टखनों, चेहरे और पेट के आसपास सूजन दिखाई देने लगती है। आयुर्वेद विशेषज्ञ का कहना है कि जब शरीर मिनरल्स का संतुलन बनाए नहीं रख पाता, तब अतिरिक्त तरल पदार्थ ऊतकों में जमा होने लगता है और शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है।
किन लोगों में ज्यादा होती है यह परेशानी?
यह समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है, खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान। पीरियड्स से पहले और गर्भावस्था के समय इसका खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा अधिक नमक खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और हृदय, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां भी वॉटर रिटेंशन की वजह बन सकती हैं।
वॉटर रिटेंशन के प्रमुख लक्षण
शरीर में पानी जमा होने पर कई तरह के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें शरीर में भारीपन महसूस होना, जोड़ों में अकड़न, हाथ-पैरों में सूजन और तेजी से वजन बढ़ना शामिल है। यदि इस स्थिति पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, किडनी संबंधी समस्याओं या हृदय रोग जैसी गंभीर स्थितियों का कारण भी बन सकती है।
वॉटर रिटेंशन से बचने के आसान उपाय
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नमक का सेवन सीमित रखें और प्रोसेस्ड व जंक फूड से दूरी बनाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, रोजाना हल्का व्यायाम या टहलना और लंबे समय तक एक ही जगह पर लगातार बैठे रहने से बचना भी इस समस्या से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है। यदि सूजन लगातार बनी रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
घरेलू उपायों से भी मिल सकती है राहत
आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे केला, हरी सब्जियां, दही और मेवे शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। कुलथी का पानी और पार्सले का सेवन प्राकृतिक रूप से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने में मदद करता है। हल्की मालिश और ठंडे पानी से स्नान करने से भी रक्त संचार बेहतर हो सकता है।
सूजन होने पर क्या करें?
यदि सूजन नई है और अधिक नहीं है, तो ठंडी सिंकाई करना लाभदायक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोल्ड थेरेपी सूजन और दर्द कम करने में मदद करती है, जबकि हीट थेरेपी से रक्त संचार बढ़ने के कारण ताजा सूजन और बढ़ सकती है। इसलिए सूजन की स्थिति में ठंडी सिंकाई को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।