नई दिल्ली: भारत में बीमारियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब संक्रामक रोग और बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारियां सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थीं, लेकिन अब खराब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। हालिया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के संकेत बताते हैं कि अस्वस्थ खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और नशे की आदतें कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की बड़ी वजह बनती जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली ने ऐसी बीमारियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी की है, जिन्हें काफी हद तक सही आदतों के जरिए रोका जा सकता है।
मोटापा बन रहा कई बीमारियों की जड़
मोटापा आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक कैलोरी वाला भोजन, जंक फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में बढ़ने वाली अतिरिक्त चर्बी केवल वजन नहीं बढ़ाती, बल्कि सूजन संबंधी समस्याओं को भी बढ़ावा देती है। तनाव के कारण होने वाली ‘स्ट्रेस ईटिंग’ भी मोटापे का बड़ा कारण बन रही है।
हाइपरटेंशन का बढ़ता खतरा
उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण कई बार दिखाई नहीं देते।
फास्ट फूड, अधिक नमक वाला भोजन, अनियमित दिनचर्या और लगातार मानसिक तनाव रक्तचाप बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर हाइपरटेंशन हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
टाइप-2 डायबिटीज में लाइफस्टाइल की बड़ी भूमिका
टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पेट के आसपास बढ़ती चर्बी, शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक प्रोसेस्ड या पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं।
हालांकि कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश लोगों में जीवनशैली संबंधी कारक ही इस बीमारी के पीछे प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
अस्थमा के पीछे भी छिपी हो सकती हैं खराब आदतें
अस्थमा को केवल पर्यावरणीय कारणों से जोड़कर नहीं देखा जाता। विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान और तंबाकू का सेवन फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और अस्थमा के खतरे को बढ़ा सकता है।
इसके अलावा मोटापा भी सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है। जब शरीर का वजन अधिक होता है, तो फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
कैसे करें इन बीमारियों से बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं।
घर का ताजा और संतुलित भोजन खाने को प्राथमिकता दें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं।
तनाव को नियंत्रित करने के लिए ध्यान, योग और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को अपनाया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
रोजाना शारीरिक गतिविधि है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रण, रक्तचाप संतुलित रखने और ब्लड शुगर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रतिदिन कम से कम कुछ समय पैदल चलना, योग करना या अन्य शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नशे से दूरी भी जरूरी
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन आदतों से दूरी बनाकर फेफड़ों, हृदय और पूरे शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मोटापा, हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज और अस्थमा जैसी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।