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Indian Press House > Blog > Latest News > नई सोलर पॉलिसी लागू: छत पर सोलर लगवाना होगा महंगा? जानिए जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ और क्या मिलेगा फायदा
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नई सोलर पॉलिसी लागू: छत पर सोलर लगवाना होगा महंगा? जानिए जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ और क्या मिलेगा फायदा

vineet verma
Last updated: June 4, 2026 10:17 am
vineet verma
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 1 जून से नई सोलर पॉलिसी लागू कर दी है, जिसका उद्देश्य देश में सोलर उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। सरकार के इस कदम को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देने वाला माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही रूफटॉप सोलर लगवाने वाले उपभोक्ताओं की लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था का सीधा असर ग्राहकों और सोलर कंपनियों दोनों पर पड़ सकता है।

Contents
क्या है नई सोलर पॉलिसी?सब्सिडी और नेट मीटरिंग के नियमों में बड़ा बदलावदेश में तैयार होगा मजबूत सोलर मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्कग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?बढ़ती मांग से कीमतों पर बन सकता है दबावपीएम सूर्य घर योजना में कितनी मिलती है सब्सिडी?योजना के लिए आवेदन कैसे करें?सोलर पैनल लगाने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

क्या है नई सोलर पॉलिसी?

घरों की छतों पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल सोलर सेल की मदद से बिजली पैदा करते हैं। अब तक बाजार में ऐसे कई सोलर पैनल उपलब्ध थे, जिनमें इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल विदेशों, विशेष रूप से चीन से आयात किए जाते थे और भारत में उनकी असेंबलिंग की जाती थी। वहीं कुछ कंपनियां देश में ही सोलर सेल और मॉड्यूल का निर्माण भी करती हैं।

नई नीति के तहत सरकार ने एएलएमएम (अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल एंड मैन्युफैक्चरर्स) की नई सूची जारी की है। इस सूची में केवल उन्हीं कंपनियों को शामिल किया गया है जो भारत में निर्मित सोलर सेल का उपयोग कर सोलर पैनल तैयार करती हैं। अब सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए इन्हीं कंपनियों के पैनल मान्य होंगे।

सब्सिडी और नेट मीटरिंग के नियमों में बड़ा बदलाव

नई व्यवस्था के अनुसार पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत केवल एएलएमएम सूची-2 में शामिल कंपनियों के सोलर पैनल लगाने पर ही सब्सिडी और नेट मीटरिंग की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा पैनल में उपयोग होने वाले सोलर सेल भी सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल होने चाहिए।

यह नियम केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी लागू होगा। सोलर उद्योग से जुड़े डेवलपर्स ने इस नीति को लागू करने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की थी, ताकि घरेलू उत्पादन क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

देश में तैयार होगा मजबूत सोलर मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क

सरकार का लक्ष्य सोलर क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है। रिपोर्टों के अनुसार देश में सालाना करीब 200 गीगावॉट सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता विकसित हो चुकी है।

हालांकि सोलर सेल निर्माण क्षमता अभी लगभग 30 गीगावॉट प्रतिवर्ष ही है। यही कारण है कि भारत में बनने वाले अधिकांश सोलर मॉड्यूल अब भी आयातित सोलर सेल पर निर्भर हैं। नई नीति के जरिए इस स्थिति को बदलने और पूरी सप्लाई चेन को देश के भीतर विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?

नई नीति लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम की लागत बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि प्रति किलोवॉट सोलर सिस्टम की कीमत में लगभग 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

इसका मतलब है कि यदि कोई उपभोक्ता अपने घर पर 5 किलोवॉट का सोलर सिस्टम लगवाता है, तो उसे करीब 15,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत में निर्मित सोलर सेल की लागत आयातित सोलर सेल की तुलना में अधिक है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि अब स्वीकृत सूची में शामिल सोलर पैनलों की मांग तेजी से बढ़ेगी। साथ ही सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और औपचारिकताएं भी बढ़ सकती हैं।

बढ़ती मांग से कीमतों पर बन सकता है दबाव

भारत में हर वर्ष लगभग 50 गीगावॉट सोलर पैनलों की मांग रहती है। वर्तमान में देश में केवल 25 से 30 गीगावॉट क्षमता के पैनल ही तैयार किए जाते हैं। ऐसे में घरेलू उत्पादन और आयातित उत्पादों का अनुपात लगभग बराबर है।

नई नीति लागू होने के बाद स्थानीय स्तर पर निर्मित सोलर पैनलों की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है। मांग बढ़ने और सीमित आपूर्ति की स्थिति में कीमतों पर दबाव बन सकता है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

पीएम सूर्य घर योजना में कितनी मिलती है सब्सिडी?

पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत सरकार रूफटॉप सोलर लगाने वालों को आकर्षक सब्सिडी प्रदान करती है।

1 किलोवॉट सोलर सिस्टम पर लगभग 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। 2 किलोवॉट क्षमता पर यह राशि 60,000 रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता वाले सिस्टम पर अधिकतम 78,000 रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध है।

कई राज्य सरकारें भी अलग से अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं का कुल खर्च काफी कम हो जाता है। इसके अलावा योजना के तहत हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी मिलता है।

योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

पीएम सूर्य घर योजना के तहत लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। आवेदन प्रक्रिया में राज्य, बिजली वितरण कंपनी और उपभोक्ता संख्या दर्ज करनी होती है। मोबाइल नंबर और ई-मेल के जरिए पंजीकरण पूरा करने के बाद रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया जा सकता है।

आवेदन स्वीकृत होने के बाद उपभोक्ता अधिकृत विक्रेता का चयन कर सोलर पैनल लगवा सकता है। इसके बाद बिजली वितरण कंपनी द्वारा सत्यापन किया जाता है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है।

सोलर पैनल लगाने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल में बड़ी कमी आती है और कई मामलों में मासिक बिल लगभग शून्य तक पहुंच सकता है। ऑन-ग्रिड सिस्टम के जरिए अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है, जिसके बदले उपभोक्ता को क्रेडिट मिलता है।

दिन में उत्पन्न अतिरिक्त बिजली का लाभ रात के समय बिजली उपयोग के लिए लिया जा सकता है। इस तरह उपभोक्ता न केवल बिजली बिल बचाता है, बल्कि लंबी अवधि में अपनी ऊर्जा लागत को भी काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है।

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