लखनऊ: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को रामपुर जिला जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान के खिलाफ हुई कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए भाजपा सरकार को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि जब वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है। अखिलेश ने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार देते हुए भाजपा से न्याय की उम्मीद नहीं होने की बात भी कही।
आजम खान को यह कार्रवाई उस समय झेलनी पड़ी, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में जमानत मिली थी। जेल से रिहा होने के बाद ईडी की टीम ने उन्हें अपने साथ ले लिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है, जिसका संबंध आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से है। इस पूरे घटनाक्रम पर अखिलेश यादव के अलावा खुद आजम खान और उनके वकीलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
‘भाजपा से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती’, अखिलेश ने साधा निशाना
आजम खान को ईडी की हिरासत में लिए जाने को लेकर लखनऊ एयरपोर्ट पर अखिलेश यादव से सवाल किया गया। इस पर सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। अखिलेश यादव दिल्ली में रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे।
इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि आज के हुक्मरानों को याद रहना चाहिए कि जब वक्त बदल जाता है तो तख्त भी बदल जाता है। आजम खान के खिलाफ मुकदमों के जरिए जो साजिश रची जा रही है, उसे सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया देख रही है।
अखिलेश ने आगे कहा कि एक उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह झूठे मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना बेहद कायराना हरकत है। उन्होंने मौजूदा सत्ता पर गलत परंपरा को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब हवा बदलेगी तो आज सत्ता में बैठे लोग भी इसी रवैये के शिकार हो सकते हैं। तब उनके लिए बच निकलना आसान नहीं होगा।
सपा प्रमुख ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब नाइंसाफी हद पार कर जाती है तो वही जुल्म करने वालों के लिए मुसीबत बन जाती है।
‘मुसलमान होने की सजा है’, हिरासत में लिए जाने पर छलका आजम खान का दर्द
ईडी की कार्रवाई के बाद आजम खान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मीडिया ने जब उनसे इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए बचा ही क्या है। उन्होंने इस कार्रवाई को मुसलमान होने की सजा बताया।
आजम खान ने कहा, “मुसलमान होने की सजा है। गलती बस ये है कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। बच्चों के लिए स्कूल बनाए, यही गुनाह है हमारा बस।”
उनके इस बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। आजम खान ने अपनी यूनिवर्सिटी और बच्चों के लिए स्कूल बनाने को लेकर हो रही कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
‘जेल से निकलते ही उठा ले गए’, आजम खान के वकीलों ने उठाए सवाल
ईडी की कार्रवाई को लेकर आजम खान के वकील जुबैर खान ने भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आजम खान को अपने साथ ले जाने आए थे, उन्होंने अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखाए। ऐसे में उन्हें यह जानकारी नहीं है कि वे कौन थे और आजम खान को हिरासत में लेने का आधार क्या था।
जुबैर खान ने कहा कि आजम खान सांसद और विधायक रह चुके हैं तथा एक सम्मानित व्यक्ति हैं। ऐसे में उन्हें इस तरह अपने साथ ले जाने से तकलीफ होना स्वाभाविक है।
वहीं, आजम खान के एक अन्य वकील नसीर सुल्तान ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के दौरान उसके आधार की जानकारी देना और परिवार को सूचना देना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि आजम खान जैसे ही जेल से बाहर निकले, उन्हें अपने साथ ले जाया गया।
अब्दुल्ला आजम को मिली राहत, पिता को ईडी ने हिरासत में लिया
इस पूरे घटनाक्रम में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान भी चर्चा में हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को जमानत दी थी। इसके बाद देर शाम आजम खान रामपुर जिला जेल से बाहर आए।
हालांकि, उनकी रिहाई के तुरंत बाद जेल के बाहर मौजूद ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया और अपने साथ रवाना हो गई। दूसरी ओर, जमानत मिलने के बाद अब्दुल्ला आजम खान अपने घर के लिए रवाना हो गए।
आजम खान की रिहाई के तुरंत बाद हुई ईडी की इस कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए वक्त बदलने पर सत्ता बदलने की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ आजम खान और उनके वकीलों ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं।