नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से दुनिया के कई क्षेत्रों में अपनी जगह बना रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कारोबार से लेकर तकनीक तक इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन इसी तेजी के साथ इसके संभावित खतरों को लेकर बहस भी तेज हो गई है। अब गूगल के पूर्व इंजीनियर और मशीन इंटेलिजेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट (MIRI) के अध्यक्ष नेट सोरेस ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने इस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उनका अनुमान है कि अगले 10 साल के भीतर मानवता के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। सोरेस का मानना है कि इंसानों के पास शायद एक दशक का समय भी नहीं बचा है।
सोरेस ने यह बात अमेरिकी पत्रिका ‘द अटलांटिक’ को दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने बताया कि एआई के भविष्य को लेकर उनकी चिंता इतनी गंभीर है कि उन्होंने पिछले करीब 10 साल से अपनी रिटायरमेंट बचत में कोई नया योगदान नहीं किया है। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत आकलन है, न कि मानवता के भविष्य को लेकर कोई प्रमाणित वैज्ञानिक निष्कर्ष।
‘मैं अभी रिटायरमेंट के लिए बचत नहीं कर रहा हूं’
इंटरव्यू के दौरान नेट सोरेस ने बताया कि गूगल में काम करने के दौरान उनका 401(k) रिटायरमेंट अकाउंट खुला था, लेकिन पिछले एक दशक से उन्होंने उसमें कोई योगदान नहीं दिया है। उन्होंने कहा, “मैं अभी रिटायरमेंट के लिए बचत नहीं कर रहा हूं। गूगल में काम करने के दौरान मेरा एक 401(k) अकाउंट बना था, लेकिन मैंने पिछले 10 सालों से उसमें कोई योगदान नहीं दिया है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें वास्तव में लगता है कि अगले 10 साल में मानवता के खत्म होने की संभावना 50 प्रतिशत से अधिक है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें ऐसा ही लगता है। उनके मुताबिक, इस बात की आशंका 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है कि इंसानों के पास अब एक दशक का समय नहीं बचा है।
2014 में गूगल छोड़कर AI सुरक्षा पर करने लगे शोध
नेट सोरेस ने साल 2014 में गूगल छोड़ दिया था। इसके बाद वह अमेरिका के बर्कले स्थित गैर-लाभकारी संस्थान मशीन इंटेलिजेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट (MIRI) से जुड़ गए। यह संस्थान उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर शोध करता है।
सोरेस ने कई वर्षों तक इस सवाल पर काम किया है कि भविष्य के उन्नत एआई सिस्टम को किस तरह विकसित किया जाए, ताकि वे इंसानों के इरादों और हितों के अनुरूप काम करें। उनकी चिंता यह है कि अगर एआई सिस्टम इंसानी नियंत्रण से बाहर जाकर अपने लक्ष्य तय करने लगे, तो इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं।
अपनी किताब में भी जता चुके हैं AI से बड़े खतरे की आशंका
साल 2025 में प्रकाशित अपनी किताब ‘इफ एनीवन बिल्ड्स इट, एवरीवन डाइज’ में सोरेस ने उन्नत एआई से जुड़े संभावित खतरों पर विस्तार से चर्चा की है। उनका तर्क है कि सुपर इंटेलिजेंट एआई ऐसे लक्ष्य विकसित कर सकता है, जो इंसानी हितों से मेल न खाते हों। ऐसी स्थिति में मानवता के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
उनकी चिंता केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि एआई इंसानों की नौकरियां छीन सकता है या रोजमर्रा के कामों को बदल सकता है। वह उस स्थिति को लेकर आगाह कर रहे हैं, जब बेहद सक्षम एआई सिस्टम इंसानी नियंत्रण और समझ से आगे निकल जाएं।
जेफ्री हिंटन भी जता चुके हैं AI के इंसानों पर हावी होने का खतरा
एआई के संभावित खतरों को लेकर चिंता जताने वालों में कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन का नाम भी शामिल है। उन्हें अक्सर ‘एआई का गॉडफादर’ कहा जाता है। हिंटन ने अनुमान जताया था कि एआई सिस्टम के इंसानों पर हावी होने की संभावना 10 से 20 प्रतिशत हो सकती है।
उन्होंने कहा था कि एआई सिस्टम जिस तेजी से विकसित हो रहे हैं, उसके मुकाबले आम लोगों को उनके संभावित परिणामों की सीमित जानकारी है। हिंटन ने यह भी स्पष्ट किया था कि 10 से 20 प्रतिशत का यह आंकड़ा उनका अनुमान है।
AI की तरक्की के साथ क्यों बढ़ रही है सुरक्षा की चिंता?
एआई तकनीक के विकास के साथ इसके इस्तेमाल और नियंत्रण को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के बीच इस बात पर चर्चा जारी है कि अधिक सक्षम एआई सिस्टम को इंसानी निर्देशों के अनुरूप कैसे रखा जाए और यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि उनका इस्तेमाल मानवता के हित में हो।
नेट सोरेस और जेफ्री हिंटन की चेतावनियां इसी व्यापक बहस का हिस्सा हैं। हालांकि, मानवता के अस्तित्व को लेकर बताई गई समय-सीमा और संभावनाएं उनके व्यक्तिगत आकलन हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।