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West Bengal Politics: क्या शिवसेना-NCP की तरह टूटने वाली है TMC? ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 60 विधायकों का ‘खेला’, संकट में ममता बनर्जी

news desk
Last updated: June 3, 2026 12:43 pm
news desk
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पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब एक बड़े विस्फोट में बदल चुका है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा (Sandipan Saha) की अगुवाई में टीएमसी के भीतर महाराष्ट्र जैसी बड़ी बगावत की पटकथा लिख दी गई है।

Contents
59 विधायकों के दस्तखत वाला पत्र स्पीकर को सौंपा: क्या हैं बागियों की मांगें?बगावत की इनसाइड स्टोरी: अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर फूटा गुस्सा1998 का इतिहास: सोनिया गांधी और ममता बनर्जी का वो संयोगआगे क्या?

सूत्रों और संख्या बल के दावों के मुताबिक, टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायकों का समर्थन बागी गुट को हासिल है। इसके साथ ही पार्टी न सिर्फ टूटने की कगार पर खड़ी है, बल्कि सिंबल (चुनाव चिन्ह) खोने का खतरा भी मंडराने लगा है।

59 विधायकों के दस्तखत वाला पत्र स्पीकर को सौंपा: क्या हैं बागियों की मांगें?

कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में सोमवार रात चली मैराथन बैठकों के बाद बागी विधायकों का समूह विधानसभा पहुंच चुका है।

  • विधानसभा अध्यक्ष को पत्र: बागी गुट ने 59-60 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाला पत्र विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्र बोस को सौंप दिया है।
  • ममता बनर्जी को झटका: इस पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) और ममता बनर्जी को केवल ‘विधायक दल का नेता’ मान्यता देने की मांग की गई है।
  • सिर्फ 21 विधायक ममता के साथ? अगर आंकड़ों का यह गणित सही साबित होता है, तो आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के खेमे में केवल 21 विधायक ही रह जाएंगे।

बागी विधायक मुस्तफिजुर रहमान का बयान: “हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए। इसी वजह से हमें यह कड़ा रुख अपनाना पड़ा है।”

बगावत की इनसाइड स्टोरी: अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर फूटा गुस्सा

पार्टी के भीतर इस ऐतिहासिक विद्रोह के पीछे पांच सबसे बड़े कारण सामने आ रहे हैं, जिन्हें लेकर पार्टी कार्यकर्ता और सीनियर लीडर्स लंबे समय से घुट रहे थे:

  1. अभिषेक बनर्जी का बढ़ता दखल (परिवारवाद): ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने और पुराने, वफादार सीनियर नेताओं को किनारे करने को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा है।
  2. I-PAC की कॉर्पोरेट कार्यशैली: विधायकों का आरोप है कि प्रोफेशनल एजेंसी I-PAC के जरिए पार्टी को एक ‘जागीर’ या कॉर्पोरेट ऑफिस की तरह चलाया जा रहा था, जिससे जमीन से जुड़े नेताओं का संवाद खत्म हो गया।
  3. भ्रष्टाचार और घमंड: हार के बाद आत्ममंथन करने के बजाय नेतृत्व के घमंड और भ्रष्टाचार के आरोपों ने आग में घी का काम किया।
  4. फ्लॉप साबित हुआ ममता का धरना: मंगलवार को ममता बनर्जी द्वारा दिए गए धरने से साफ हो गया कि जमीनी पकड़ ढीली हो चुकी है। इस विरोध प्रदर्शन में टीएमसी के कुल विधायकों और सांसदों में से सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए, जो नेतृत्व के लिए बेहद चिंताजनक है।

1998 का इतिहास: सोनिया गांधी और ममता बनर्जी का वो संयोग

राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी घटना को साल 1998 के इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं।

  • 1998 में क्या हुआ था? यह वही साल था जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस की आंतरिक कलह से तंग आकर अपनी नई पार्टी ‘तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) का गठन किया था।
  • सोनिया गांधी का उदय: दिलचस्प बात यह है कि 1998 में ही सोनिया गांधी ने भी सक्रिय राजनीति में कदम रखा था और कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला था।

आज करीब 28 साल बाद इतिहास खुद को दोहरा रहा है, लेकिन इस बार ममता बनर्जी कांग्रेस की भूमिका में हैं और उनकी अपनी बनाई पार्टी में ठीक वैसी ही टूट हो रही है जैसी उन्होंने कभी कांग्रेस में की थी।

आगे क्या?

  • दल-बदल कानून (Anti-Defection Law): यदि बागी गुट के पास दो-तिहाई (2/3) से ज्यादा यानी 80 में से 54 से अधिक विधायक हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा और वे खुद को असली टीएमसी घोषित कर सकते हैं।
  • चुनाव चिन्ह पर खतरा: शिवसेना और एनसीपी के मामलों को देखते हुए, यदि मामला चुनाव आयोग जाता है, तो ममता बनर्जी के हाथ से ‘TMC’ का नाम और सिंबल भी निकल सकता है।

पश्चिम बंगाल की इस महा-बगावत से जुड़े हर पल के लाइव अपडेट्स और विश्लेषण के लिए हमारे लाइव ब्लॉग के साथ बने रहिए।

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TAGGED: Abhishek Banerjee, Bengal Vidhan Sabha Speaker, Mamata Banerjee, Ritabrata Banerjee, Sandipan Saha, TMC Split, West Bengal Politics Live
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