टेक सेक्टर में छंटनी 2025
साल 2025 अभी खत्म भी नहीं हुआ है, लेकिन टेक इंडस्ट्री में छंटनियों ने पहले ही डराने वाली तस्वीर पेश कर दी है। अमेरिका की टेक कंपनियां अब तक 1.22 लाख से ज्यादा नौकरियां काट चुकी हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंकड़ा 1.26 लाख से लेकर 1.54 लाख तक पहुंच गया है, जो 2024 की तुलना में 17 से 65 प्रतिशत ज्यादा है। महामारी के बाद यह टेक सेक्टर की सबसे बड़ी छंटनी लहर मानी जा रही है। बड़ा सवाल यही है कि क्या इसके पीछे असली वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, या फिर AI को सिर्फ एक बहाना बनाया जा रहा है?
2025 में छंटनियों का सबसे बड़ा असर दिग्गज टेक कंपनियों पर दिखा है। इंटेल ने अकेले 21 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को हटाने की योजना बनाई। अमेज़न ने अक्टूबर में 14 हजार कॉर्पोरेट नौकरियां खत्म कीं, जबकि माइक्रोसॉफ्ट ने अलग-अलग दौर में करीब 15 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। गूगल, मेटा, सेल्सफोर्स, वर्कडे और एचपी जैसी कंपनियों ने भी सैकड़ों से हजारों नौकरियां कम कीं। सिर्फ बिग टेक ही नहीं, बल्कि स्टार्टअप्स और ईवी-सोलर सेक्टर की कंपनियां भी इस मार से नहीं बच पाईं।
कई कंपनियां छंटनी का कारण AI को बता रही हैं, लेकिन आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं। 2025 में AI के नाम पर हुई छंटनियां कुल कटौतियों का 5 प्रतिशत से भी कम हैं। विशेषज्ञ इसे “AI-वॉशिंग” कह रहे हैं, यानी लागत घटाने और पुनर्संरचना जैसे फैसलों को AI की चमकदार पैकेजिंग में पेश किया जा रहा है। असल वजहें हैं—ऊंची ब्याज दरें, आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर उपभोक्ता मांग और कंपनियों का मुनाफा दबाव।
ये छंटनियां सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि लाखों परिवारों की रोज़मर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रही हैं। मिड-लेवल इंजीनियर और डिजाइनर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जबकि नई भर्तियां बेहद धीमी हो चुकी हैं। टेक सेक्टर अमेरिकी GDP का बड़ा हिस्सा है, इसलिए इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले सालों में री-स्किलिंग ही सबसे बड़ा हथियार होगा। AI जॉब किलर बनेगा या नई नौकरियों का रास्ता खोलेगा—इसका जवाब भविष्य ही देगा।
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