कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने अपनी भावी चुनावी राजनीति को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। मंड्या में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि वह 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
मई 2026 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया का यह बयान राज्य के सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। उनके इस फैसले को कांग्रेस में अगली पीढ़ी के नेतृत्व को कमान सौंपने और चुनावी राजनीति से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मंड्या में जनता से किया सीधा संवाद
मंड्या दौरे पर पहुंचे सिद्धारमैया ने बिना किसी लाग-लपेट के चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की बात कही। उन्होंने जनता से कहा, “मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लडूंगा।” हालांकि, उन्होंने सक्रिय राजनीति या पार्टी के लिए काम करने से संन्यास लेने की बात नहीं कही है, लेकिन बतौर उम्मीदवार यह उनका आखिरी कार्यकाल माना जा रहा है।
CM पद से इस्तीफे के बाद बदली कर्नाटक की राजनीति
सिद्धारमैया का यह फैसला राज्य में हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन के बाद सामने आया है:
- 28 मई 2026 को दिया था इस्तीफा: कांग्रेस आलाकमान के निर्देश और आंतरिक शक्ति-संतुलन के तहत सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
- डी. के. शिवकुमार को मिली कमान: सिद्धारमैया के हटने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार (D. K. Shivakumar) के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हुआ।
- पीढ़ीगत बदलाव के संकेत: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव न लड़ने का ऐलान करके सिद्धारमैया ने अब शिवकुमार और राज्य के युवा नेताओं के लिए पूरी तरह मैदान छोड़ दिया है।
2028 का चुनाव और कांग्रेस की नई रणनीति
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन 70 के दशक से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे सिद्धारमैया का यह कदम पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह को शांत करने में मददगार साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि सिद्धारमैया के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद कर्नाटक कांग्रेस का भावी चेहरा पूरी तरह किस दिशा में आगे बढ़ता है।