पटना, 15 अप्रैल 2026 — बिहार राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। सम्राट चौधरी आज लोक भवन में बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और वे राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी के लिए बिहार में एक लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी सफलता है। नीतीश कुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सम्राट चौधरी को भाजपा और एनडीए विधायक दल का एकमत नेता चुना गया।
समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को शपथ दिलाई। दो जद(यू) नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है, जिससे गठबंधन की निरंतरता बनी रहे। एनडीए के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष नितिन नब्बिन समेत कई प्रमुख नेता इस मौके पर मौजूद रहे।
सम्राट चौधरी कौन हैं? राजनीतिक यात्रा का अनोखा सफर
सम्राट चौधरी (57 वर्ष) का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे आरजेडी सरकार में राबड़ी देवी के मंत्री रह चुके हैं, बाद में जद(यू) में शामिल हुए और 2015 से भाजपा के साथ सक्रिय हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक रहे, जबकि मां पार्वती देवी भी विधायक रहीं। परिवार की राजनीतिक विरासत के साथ उन्होंने भाजपा में संगठनात्मक भूमिका निभाई और हाल में गृह मंत्रालय संभाला।
यह पहला मौका है जब भाजपा बिहार में सीधे मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुई है। नीतीश कुमार के 20 वर्ष से अधिक के शासन के बाद यह सत्ता हस्तांतरण बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
सम्राट चौधरी का पहला संदेश
शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा, “मैं अखंडता और निष्ठा के साथ बिहार की सेवा करूंगा। भाजपा ने मुझे कई अवसर दिए। अब पीएम मोदी के नेतृत्व में बिहार को नई ऊंचाई दी जाएगी।”
यह शपथ ग्रहण समारोह बिहार राजनीति में ‘नीतीश युग’ से ‘सम्राट युग’ की ओर बदलाव का प्रतीक है। विपक्षी महागठबंधन ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी है, जबकि एनडीए इसे स्थिरता और विकास का नया दौर बता रहा है।