झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव दो सीटों के लिए है, लेकिन जिस तरह दोनों प्रमुख गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, उससे यह मुकाबला सामान्य चुनाव से कहीं अधिक दिलचस्प बन गया है। सबसे ज्यादा चर्चा NDA द्वारा अपने विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराने को लेकर हो रही है।
संख्या बल INDIA गठबंधन के पक्ष में
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के पास करीब 56 विधायक हैं। यह संख्या दोनों राज्यसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। दूसरी ओर NDA के पास लगभग 24 विधायक हैं, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या से कम हैं।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि जब NDA के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, तो उसने चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारने का फैसला किस भरोसे पर किया।
इस चुनाव में NDA ने भाजपा का आधिकारिक उम्मीदवार उतारने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। नाथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी राह आसान नहीं दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA को जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। इसी कारण चुनाव से पहले संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि किसी भी दल ने सार्वजनिक रूप से क्रॉस-वोटिंग की संभावना स्वीकार नहीं की है।
16 जून को NDA ने अपने सभी विधायकों को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में शिफ्ट कर दिया। भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि विधायक मतदान तक होटल में ही रहेंगे और वोटिंग के बाद वापस लौटेंगे।
इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर जब किसी चुनाव से पहले विधायकों को होटल या रिसॉर्ट में रखा जाता है, तो इसे संभावित राजनीतिक जोड़तोड़ या विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति के रूप में देखा जाता है।
हालांकि भाजपा नेताओं ने इन अटकलों को खारिज किया है। भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि किसी विधायक को जबरदस्ती होटल में नहीं रखा गया है और सभी अपनी इच्छा से वहां मौजूद हैं। उनके मुताबिक यह केवल चुनावी तैयारी और एकजुटता बनाए रखने का प्रयास है।
दिलचस्प बात यह है कि सतर्कता सिर्फ NDA की ओर से ही नहीं दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपने आवास पर गठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में मॉक वोटिंग कराई गई और सभी विधायकों को एकजुट रहने का संदेश दिया गया।
इससे संकेत मिलता है कि संख्या बल मजबूत होने के बावजूद INDIA गठबंधन भी किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। यदि गठबंधन के कुछ विधायक भी इधर-उधर होते हैं तो चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल झारखंड का राज्यसभा चुनाव केवल दो सीटों का चुनाव नहीं रह गया है। एक तरफ NDA है, जिसके पास संख्या कम होने के बावजूद आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ INDIA गठबंधन है, जिसके पास बहुमत है लेकिन वह भी पूरी सतर्कता बरत रहा है।
होटल में ठहरे विधायक, मुख्यमंत्री आवास पर बैठकों का दौर और दोनों पक्षों के जीत के दावे इस चुनाव को राजनीतिक सस्पेंस में बदल चुके हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NDA को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है, या फिर यह पूरी कवायद केवल एक राजनीतिक संदेश देने की रणनीति है। इसका जवाब मतदान के नतीजों के साथ ही सामने आएगा।
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