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सपा में टूट के दावे पर अखिलेश यादव का पलटवार, बोले- ‘जो डर गया वो…’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक तपिश सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है। सूबे में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच रार लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच, कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने यूपी की राजनीति में एकाएक हलचल पैदा कर दी, जिस पर अब खुद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बेहद रहस्यमयी अंदाज में पलटवार कर बड़ा कूटनीतिक संकेत दे दिया है।

अखिलेश यादव ने राजभर और बीजेपी खेमे को चुनौती देते हुए कहा है कि ‘जो डर जाएगा, वह तो छोड़कर चला जाएगा. भाजपा से मुकाबले के लिए टीम बहादुर होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा ‘समाजवादी पार्टी कई उतार-चढ़ाव देख चुकी है और पार्टी संघर्ष से पीछे हटने वाली नहीं है।

इससे पहले, बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद चौंकाने वाला दावा ठोक दिया था। राजभर ने विपक्षी खेमे में मनोवैज्ञानिक दरार डालने के मकसद से लिखा:

“समाजवादी पार्टी में बहुत बड़ी टूट होगी। रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, यह पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। अब जब जांच का शिकंजा कस रहा है, तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र और बंगाल को छोड़िए, अब समूची सपा ही भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।”

राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा

“समाजवादी पार्टी में बहुत बड़ी टूट होगी। रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। महाराष्ट्र और बंगाल को तो भूल जाइए, अब समूची समाजवादी पार्टी ही भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।”

घोटालों का जिक्र कर अखिलेश यादव पर साधा निशाना

सपा को निशाने पर लेते हुए ओम प्रकाश राजभर यहीं नहीं रुके। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पुराने और चर्चित घोटालों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की घेराबंदी की। राजभर ने लिखा कि खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, यह बात पूरा उत्तर प्रदेश अच्छी तरह जानता है। अब जैसे-जैसे इन मामलों में जांच का शिकंजा कस रहा है, वैसे-वैसे समाजवादी पार्टी की परेशानी और बौखलाहट बढ़ती जा रही है।

राजभर के दावे के पीछे का सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजभर का यह बयान सपा के भीतर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक राजभर के इस सनसनीखेज दावे पर कोई आधिकारिक पलटवार या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने उत्तर प्रदेश के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

अभी हाल ही में जिस तरह पश्चिम बंगाल में टीएमसी की टूट देखने को मिली है या इससे पहले शिवसेना और एनसीपी टूटी उसे देखते हुए ओम प्रकाश राजभर के बयान से यूपी का सियासी पारा बेहद चढ़ गया है।

news desk

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