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ईरान की ‘पीस फर्स्ट’ रणनीति: क्या यह ट्रंप के लिए एक जाल है?

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहाँ कूटनीति की बिसात पर ‘शह और मात’ का खेल शुरू हो गया है।

ईरान ने एक ‘रिवर्स गेमप्लान’ चलते हुए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें परमाणु मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालकर पहले क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक रास्तों को बहाल करने की बात कही गई है।

ईरान ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अमेरिका को ‘पहले शांति, फिर परमाणु’ का फॉर्मूला पेश किया है। एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान चाहता है कि बातचीत की शुरुआत उन मुद्दों से हो जहाँ सहमति आसान है, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना और युद्ध जैसी स्थितियों को समाप्त करना।

प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

  • रणनीतिक मार्ग: होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत व्यापार के लिए खोलना।
  • प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक और नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाना।
  • परमाणु मुद्दा: यूरेनियम संवर्धन और भंडार जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा को बाद के लिए टालना।

ट्रंप का ‘मैक्सिमम प्रेशर’ बनाम ईरान का ‘ईज़ी एग्जिट’

ईरान के इस प्रस्ताव ने वाशिंगटन में एक नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के सामने अब एक बड़ी चुनौती है: क्या वे अल्पकालिक शांति के लिए अपना सबसे बड़ा हथियार (दबाव) छोड़ देंगे?

अमेरिका के लिए जोखिम और लाभ

दबाव कम होने का डर: ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु मुक्त करना है। अगर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध हटा लेता है और युद्ध का खतरा टल जाता है, तो ईरान पर भविष्य में परमाणु रियायतें देने का कोई दबाव नहीं बचेगा।

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सुधरेगी, लेकिन ट्रंप इसे अपनी हार के रूप में देख सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान के नेतृत्व में इस बात को लेकर गहरे मतभेद हैं कि अमेरिका को कितनी छूट दी जाए। यह नया प्रस्ताव संभवतः ईरान के भीतर चल रही इसी खींचतान का नतीजा है।

कूटनीतिक विफलता: पाकिस्तान से रूस तक का सफर

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की हालिया भागदौड़ यह संकेत देती है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय स
मर्थन जुटाने की कोशिश में है। इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधियों (स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर) के साथ होने वाली बैठक रद्द होने से बातचीत को बड़ा झटका लगा है।

ट्रंप ने इसे ‘समय की बर्बादी’ बताते हुए रद्द कर दिया। अरागची अब मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन से मिल सकते हैं, जो यह दिखाता है कि ईरान अब अमेरिका के खिलाफ रूस और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों (मिस्र, तुर्की, कतर) को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी समझौता केवल अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। सोमवार को ट्रंप की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ होने वाली बैठक इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

ईरान का यह प्रस्ताव दरअसल एक ‘समय खरीदने’ की कोशिश हो सकती है। अगर अमेरिका इसे मानता है, तो वह अपने सबसे मजबूत सौदेबाजी के हथियार (Bargaining Chip) को खो सकता है। वहीं, अगर ट्रंप इसे ठुकराते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

दोनों पक्षों के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है:

मुद्दाअमेरिकी मांगईरानी प्रस्ताव
संवर्धन10 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण रोक।भविष्य में चर्चा का विषय।
भंडारणसंवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजना।वर्तमान में प्रतिबंध हटाने पर जोर।
रणनीतितेल निर्यात पर नौसैनिक प्रतिबंध जारी रखना।होर्मुज स्ट्रेट खोलकर व्यापार बहाल करना।
news desk

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