अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल जंग रुकी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही ईरान के साथ एक बड़ा समझौता हो जाएगा। ट्रंप लगातार धमकी देते हैं और फिर अचानक पलट जाते हैं।
आलम यह है कि ट्रंप सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि आज की रात ईरान पर अमेरिका कहर बनकर टूटेगा, लेकिन अगले ही पल वे अपने रुख से पलट जाते हैं। अब उन्होंने ताजा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ उनका समझौता तय है और इसी वजह से अमेरिका अपने कदम पीछे खींच रहा है।
ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की अटकलें तेज हो गई हैं। अब दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, समझौते के ड्राफ्ट में कुल 14 अहम बिंदु शामिल किए गए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े शांति समझौते की अटकलें तेज हो गई हैं। मेहर न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते का 14 सूत्रीय ड्राफ्ट तैयार किया गया है। यह ड्राफ्ट तब सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बड़े समझौते की उम्मीद जताई है।
मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, समझौते के मसौदे में ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल की गई हैं:
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक कि ईरान के आधे फंड जारी नहीं किए जाते, तेल प्रतिबंध सस्पेंड नहीं होते और नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई जाती।
इस ड्राफ्ट की सबसे अहम बात यह है कि इसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को उसके समर्थन के मुद्दे को पूरी तरह से बातचीत से बाहर रखा गया है।
इस प्रस्तावित समझौते की सफलता की राह में लेबनान की स्थिति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा, जबकि हिज्बुल्लाह इजराइली सेना की पूर्ण वापसी की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते का भविष्य लेबनान में चल रहे इस संकट पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
इस मसौदे की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों के समर्थन जैसे विवादास्पद मुद्दों को इस प्रस्तावित वार्ता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।”
संक्षिप्त और स्पष्ट: “इस समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों को मिलने वाले समर्थन के मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है।”
पत्रकारिता की शैली में: “दिलचस्प बात यह है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय संगठनों को उसके सहयोग के मामलों को इस बातचीत से पूरी तरह दूर रखा गया है।”
जोर देते हुए: “ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके द्वारा समर्थित क्षेत्रीय संगठनों से जुड़े मुद्दों पर इस मसौदे में कोई चर्चा नहीं की गई है, इन्हें बातचीत से पूर्णतः अलग रखा गया है।”
फिलहाल इस ड्राफ्ट की ईरान या अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह अभी अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
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