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‘घर वापसी’ की आहट: क्या कांग्रेस छोड़कर गए दिग्गज फिर थामेंगे पुराना हाथ? विपक्षी एकता के बीच विलय की सुगबुगाहट तेज

नई दिल्ली/नागपुर। भारतीय राजनीति में एक बार फिर ‘घर वापसी’ का दौर चर्चा के केंद्र में है। क्या वे नेता, जिन्होंने कभी कांग्रेस का हाथ छोड़ अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार की थी, अब अस्तित्व की लड़ाई के लिए पुनः कांग्रेस में विलय की राह अपनाएंगे?

यह सवाल आज देश के प्रमुख विपक्षी दलों, विशेषकर ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के संदर्भ में सबसे बड़ा राजनीतिक विमर्श बन गया है।

‘अपनों’ की वापसी का आधार बना अस्तित्व का संकट

पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भारी संकट का सामना कर रही है। पार्टी में जारी बड़ी टूट और 20-21 सांसदों के भाजपा की ओर रुख करने के बाद ममता बनर्जी के सामने अपना राजनीतिक भविष्य बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे में टीएमसी का कांग्रेस में विलय ममता के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि बगावत कर रहे नेताओं के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन एक बड़ी बाधा बन सकता है।

नाना पटोले का बड़ा दावा: प्रस्ताव पर हो रही है बात

इस बीच, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के एक बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। नागपुर से दिल्ली रवाना होने से पहले पटोले ने खुलासा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की ओर से कांग्रेस के साथ विलय का प्रस्ताव पहले ही आ चुका है।

पटोले ने संकेत दिए कि केवल एनसीपी ही नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की टीएमसी सहित अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ भी व्यापक राजनीतिक सहयोग और विलय के विकल्पों पर चर्चा चल रही है।

क्यों अहम है यह ‘विलय’ की राजनीति?

पटोले के अनुसार, क्षेत्रीय दलों में अब यह समझ विकसित हो रही है कि केंद्र की मोदी सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं और संपत्तियों की रक्षा के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट होना अनिवार्य है।

  • ममता बनर्जी और शरद पवार-दोनों ही नेता कभी कांग्रेस का अहम हिस्सा हुआ करते थे, जिन्होंने बाद में अलग राहें चुनीं।
  • अब मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों ने उन्हें फिर से कांग्रेस की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है।
  • हालाँकि, टीएमसी के 19 बागी सांसदों के सामने आने और विपक्षी गठबंधन की कवायद के बावजूद, किसी भी दल ने अभी तक विलय पर कोई औपचारिक मुहर नहीं लगाई है।

क्या यह केवल एक राजनीतिक दबाव की रणनीति है या वाकई में कांग्रेस उन दिग्गजों को वापस लाने की तैयारी कर रही है जिन्होंने दशकों पहले किनारा कर लिया था? फिलहाल, औपचारिक घोषणाओं का इंतजार है, लेकिन ‘घर वापसी’ की यह चर्चा आने वाले दिनों में विपक्षी एकता की दिशा तय करने वाली है।

news desk

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