नई दिल्ली: मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आई एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, अगर इलाज के दौरान व्यक्ति की खोई हुई खुशी (Anhedonia) को वापस लाने पर फोकस किया जाए, तो यह पारंपरिक थेरेपी की तुलना में डिप्रेशन और एंग्जायटी को कम करने में ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।
मनोविज्ञान में Anhedonia का मतलब है—ऐसी स्थिति, जब व्यक्ति उन चीजों में भी आनंद महसूस नहीं कर पाता, जो पहले उसे खुशी देती थीं। यह डिप्रेशन का एक मुख्य लक्षण माना जाता है और कई बार सामान्य थेरेपी में इसे सीधे टारगेट नहीं किया जाता।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों की थेरेपी में खास तौर पर खुशी और पॉजिटिव अनुभवों को बढ़ाने पर काम किया गया, उनमें—
इसके विपरीत, पारंपरिक थेरेपी (जैसे केवल नकारात्मक विचारों को कम करना) अपेक्षाकृत कम असरदार रही।
इस नई थेरेपी में मरीजों को—
इससे दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को फिर से सक्रिय करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिसर्च भविष्य में डिप्रेशन और एंग्जायटी के इलाज के तरीके को बदल सकती है। अब सिर्फ समस्या को कम करने के बजाय, खुशी को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा।
आज के समय में तेजी से बढ़ते तनाव, अकेलापन और डिजिटल लाइफस्टाइल के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में यह नई अप्रोच लाखों लोगों के लिए अधिक प्रभावी इलाज का रास्ता खोल सकती है।
यह स्टडी बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए सिर्फ दुख को कम करना काफी नहीं है, बल्कि खुशी को फिर से महसूस कर पाना ही असली इलाज की कुंजी हो सकता है।
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