नई दिल्ली: कब्ज एक आम पाचन संबंधी परेशानी है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने पर यह पेट में भारीपन, असहजता और रोजमर्रा के कामों में परेशानी की वजह बन सकती है। बार-बार कब्ज होने से तनाव और मानसिक परेशानी भी बढ़ सकती है। ऐसे में समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारणों को समझना और सही उपाय अपनाना जरूरी है।
आयुर्वेद में नीम को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसके पत्ते, बीज, फल, फूल, तेल, जड़ और छाल का पारंपरिक रूप से अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, कब्ज के इलाज में नीम कितना प्रभावी है, इसे लेकर आयुर्वेदिक मान्यताओं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पाचन के लिए नीम के बारे में क्या कहा जाता है?
HealthifyMe के मुताबिक, नीम में एंटीऑक्सीडेंट और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं, जो सही मात्रा और उचित तरीके से सेवन किए जाने पर पाचन क्रिया में मदद कर सकते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण ने भी नीम के पत्तों को पाचन के लिए उपयोगी बताया है।
नीम में एंटी-बैक्टीरियल गुण होने की बात कही जाती है, जो आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया से निपटने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, इसे मेटाबॉलिज्म और पाचन प्रक्रिया के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
नीम में गैस कम करने वाले और एस्ट्रिंजेंट गुण होने की बात भी कही जाती है। इसके अलावा, इसमें एंटी-एसिड गुण होने का दावा किया जाता है, जो पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
इम्यूनिटी को लेकर क्या कहते हैं शोध?
नीम के पत्तों में कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुण हो सकते हैं। कुछ अध्ययनों में नीम के अर्क और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के बीच संबंध देखा गया है।
Journal of Ethnopharmacology और BMC Complementary Medicine and Therapies में प्रकाशित अध्ययनों के आधार पर नीम के अर्क का प्रतिरक्षा तंत्र पर प्रभाव देखा गया है। वहीं, PubMed Central में उपलब्ध एक रिपोर्ट में नीम में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पर संभावित प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
ब्लड शुगर पर भी दिख सकता है असर
कुछ शोधों में नीम के अर्क से ब्लड शुगर के स्तर में कमी आने की संभावना सामने आई है। हालांकि, इसे डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
Journal of Medical Food में 2021 में प्रकाशित एक क्लीनिकल ट्रायल में मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले मरीजों को नीम का अर्क दिया गया था। 12 हफ्तों बाद उनके फास्टिंग ब्लड शुगर, खाने के बाद के ब्लड शुगर और HbA1c के स्तर में सुधार देखा गया।
Pharmacological Research में प्रकाशित एक अध्ययन में भी नीम की पत्तियों के अर्क और मांसपेशियों में GLUT4 ट्रांसपोर्टर्स की गतिविधि के बीच संबंध का उल्लेख किया गया है। इससे कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के अवशोषण में मदद मिल सकती है।
शरीर की सूजन कम करने में भी हो सकता है मददगार
नीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होने की बात कई अध्ययनों में सामने आई है। इसके कुछ यौगिक सूजन से जुड़े जैविक तंत्र पर असर डाल सकते हैं।
नीम में मौजूद निमबीडिन और निम्बिन जैसे यौगिकों को लेकर भी शोध हुए हैं। Inflammation Research और Phytotherapy Research में प्रकाशित अध्ययनों में नीम के अर्क के सूजन से जुड़े कुछ एंजाइमों और प्रक्रियाओं पर प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
लिवर के लिए भी नीम पर हुए हैं अध्ययन
नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद कर सकते हैं। कुछ शोधों में नीम के पत्तों के अर्क और लिवर से जुड़े एंजाइमों पर इसके संभावित प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
Food and Chemical Toxicology तथा PMC में प्रकाशित शोधों में नीम के अर्क के लिवर एंजाइमों और ऊतकों पर संभावित प्रभाव का उल्लेख मिलता है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए नीम का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के विकल्प के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।
क्या नीम शरीर से टॉक्सिन निकालता है?
नीम को पारंपरिक चिकित्सा में शरीर की सफाई और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर भी कहा जाता है। हालांकि, शरीर से टॉक्सिन निकालने और खून साफ करने जैसे दावों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में सावधानी से समझना चाहिए।
International Journal of Ayurveda Research और त्वचा विज्ञान से जुड़ी कुछ रिसर्च में नीम के एंटीऑक्सीडेंट और अन्य जैविक गुणों पर चर्चा की गई है।
कब्ज के लिए नीम का सेवन कैसे किया जाता है?
पारंपरिक तौर पर नीम की पत्तियों का पानी, चाय और पाउडर इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग साफ नीम की पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाते हैं और छानकर पीते हैं।
नीम की 2 से 4 पत्तियों को पानी में उबालकर चाय तैयार करने का भी पारंपरिक तरीका बताया जाता है। इसके अलावा, सूखी पत्तियों को पीसकर पाउडर के रूप में लेने का चलन भी है।
हालांकि, पुरानी या बार-बार होने वाली कब्ज के लिए केवल नीम पर निर्भर रहना उचित नहीं है। कब्ज की वजह खान-पान, पानी की कमी, शारीरिक गतिविधि की कमी, दवाओं या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जुड़ी हो सकती है। इसलिए लंबे समय से कब्ज रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।