मुंबई: ‘शक्तिमान’ फेम अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी राय रखी है। उनके बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने अभिनेता की आलोचना करते हुए उनके ज्ञान पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन भी किया है।
मुकेश खन्ना ने ‘जन गण मन’ को लेकर क्या कहा?
मुकेश खन्ना ने एक बातचीत के दौरान कहा कि वह पहले भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अभिनेता ने यह दावा भी किया कि ‘जन गण मन’ को लेकर इतिहास में अलग संदर्भ रहे हैं और इसे लेकर उनके मन में सवाल हैं।
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की संवैधानिक एवं आधिकारिक स्थिति को समझे बिना इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
बयान के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मुकेश खन्ना के बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने अभिनेता पर राजनीतिक विचारों से प्रभावित होकर बयान देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने यह भी टिप्पणी की कि मनोरंजन जगत से जुड़े कई लोग अपने करियर के अंतिम दौर में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं।
वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने मुकेश खन्ना की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझना चाहिए। कुछ लोगों ने उनके बयान को प्रचार का तरीका बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे उनका व्यक्तिगत विचार बताते हुए उनका बचाव किया।
‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ की आधिकारिक स्थिति अलग
दरअसल, ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है। दोनों की संवैधानिक और आधिकारिक स्थिति अलग है। ऐसे में दोनों को एक-दूसरे के स्थान पर रखने को लेकर दिया गया कोई भी बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर सरकार के नए निर्देश
राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में निर्देश भी जारी किए गए हैं। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर 9 जुलाई 2026 को ‘राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को गाने या बजाने’ से संबंधित आदेश सूचीबद्ध किया गया है।
इन निर्देशों में दोनों के इस्तेमाल से जुड़े नियम और विभिन्न कार्यक्रमों में इनके क्रम को लेकर जानकारी दी गई है। ऐसे समय में मुकेश खन्ना का बयान सामने आने से ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
‘वंदे मातरम’ का स्वतंत्रता आंदोलन से रहा है गहरा जुड़ाव
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति की भावना का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया था।
वहीं, ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है। दोनों रचनाओं का भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
मुकेश खन्ना के बयान ने एक बार फिर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की भूमिका तथा दोनों के बीच अंतर को लेकर बहस छेड़ दी है। फिलहाल सोशल मीडिया पर अभिनेता के बयान को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।